सीजी भास्कर, 19 नवंबर। कृषि विभाग ने शीतलहर (Cold Wave Crop Protection) और गिरते तापमान को देखते हुए दंतेवाड़ा जिले के किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशा–निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने बताया कि बीते दिनों रात्रि तापमान 13°C तक पहुँच गया है और आने वाले दिनों में इसके 10°C तक गिरने की संभावना है। जिले का जैविक कृषि क्षेत्र, विशेषकर एसआरआई पद्धति से धान कटाई के बाद की रबी फसलें और सब्जियां शीतलहर के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
तापमान में तेज गिरावट के कारण पौधों की बढ़वार रुकने, कोशिकीय क्रिया धीमी होने, पत्तियों के झुलसने, पीली पड़ने और सतह पर बर्फ जमने से कोशिकाएं फटने का खतरा बढ़ जाता है। सब्जी और दलहनी फसलों में फूल झड़ना, दाना भराव रुकना, फल सेटिंग कम होना, गुच्छी और कंद वाली सब्जियों में सड़न जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। ( Agriculture Advisory Dantewada ) ठंड बढ़ने पर आलू, प्याज, लहसुन में सॉफ्ट रॉट की आशंका भी बढ़ जाती है।
कृषि विभाग ने बताए बचाव उपाय
शीतलहर से बचाव के लिए विभाग ने किसानों को शाम के समय हल्की सिंचाई करने, खेतों में रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक धुआं करने की सलाह दी है। धुआं तापमान गिरने से रोकता है और पत्तियों पर ओस जमने नहीं देता। इसके लिए पुआल, सूखी पत्तियां और लकड़ी का चूरा जलाने की सलाह दी गई है। ( Rabi Crop Safety ) धान का पुआल, सूखी घास या कंपोस्ट से मल्चिंग करने पर मिट्टी का तापमान 3–5°C अधिक रहता है।
नर्सरी और सब्जियों को ढकने के लिए पॉलीथिन, जूट बोरा, घास या टाट का उपयोग किया जा सकता है। पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जीवामृत, घन–जीवामृत, वर्मी–वॉश, गिलोय–नीम–तुलसी आधारित काढ़ा स्प्रे जैसे जैविक घोल अत्यंत प्रभावी बताए गए हैं।
देर से बोई फसलों के लिए विशेष निर्देश
विभाग ने चेतावनी दी है कि गेहूं और चना जैसी देर बोई फसलें पाला प्रभावित होने की अधिक संभावना रखती हैं। ऐसी फसलों में नियमित सिंचाई और मल्चिंग अनिवार्य है। ( Farmer Guidelines Chhattisgarh ) किसानों को फसलों की लगातार निगरानी रखने और पत्तियों के मुड़ने या सफेद परत दिखते ही तुरंत सिंचाई करने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे अपने कृषि विस्तार अधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्र गीदम से संपर्क बनाए रखें और शीतलहर के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सुझाए गए उपायों का पालन करें।



