सीजी भास्कर, 20 मई। भिलाई नगर निगम में सड़क निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल (Road Construction) उठने लगे हैं। वार्ड 22 कुरूद इलाके में बनी सड़क कुछ ही समय में जर्जर होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। सड़क की हालत देखकर लोग निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद निगम की कार्यप्रणाली भी चर्चा में आ गई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि सड़क निर्माण के बाद इतनी जल्दी खराब स्थिति कैसे बन गई। वहीं दूसरी तरफ भुगतान जारी होने और बाद में कार्रवाई की मांग उठने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
78 लाख की सड़क कुछ ही समय में खराब : Road Construction
जानकारी के मुताबिक 15वें वित्त अनुदान के तहत वार्ड 22 कुरूद में दो सड़कों के निर्माण के लिए 78 लाख 30 हजार रुपये का टेंडर मेसर्स शशांक जैन को दिया गया था। लेकिन सड़क निर्माण के करीब दो महीने बाद ही सड़क की हालत खराब हो गई। सड़क कई जगह से उखड़ी हुई दिखाई दे रही है जिससे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
महापौर ने उठाई ब्लैकलिस्ट की मांग
गुणवत्ताहीन निर्माण को लेकर महापौर नीरज पाल ने दुर्ग कलेक्टर को पत्र लिखकर संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। पत्र के साथ मामले से जुड़ी फाइल भी भेजी गई है। बताया गया कि पहले भी निर्माण गुणवत्ता और काम में देरी को लेकर नोटिस जारी किए गए थे लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
पहले नोटिस फिर भुगतान
जानकारी के अनुसार 11 जून 2025 को जोन 2 आयुक्त एशा लहरे ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के लिए निगम कमिश्नर को पत्र (Road Construction) भेजा था। इसके बाद भी ठेकेदार की ओर से गुणवत्ता रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और बाद में 15 लाख 43 हजार रुपये का रनिंग बिल पास हो गया। जबकि कार्य पूर्ण करने की अंतिम तिथि अक्टूबर 2025 तय की गई थी।
दूसरा बिल भी हुआ पास
बाद में ठेकेदार ने 35 लाख 25 हजार रुपये का दूसरा रनिंग बिल लगाया। इसके बाद समय सीमा बढ़ाकर फरवरी 2026 तक कर दी गई और कम अर्थदंड के साथ बिल का भुगतान भी कर दिया गया। नियमों के अनुसार अधिक अर्थदंड की कार्रवाई होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं होने पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं।
निगम कमिश्नर ने क्या कहा
मामले को लेकर निगम कमिश्नर राजीव पांडेय ने कहा कि अधिकारियों की जानकारी के बिना निर्माण कार्य किया (Road Construction) गया था। अब संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि करीब 50 लाख रुपये का भुगतान जारी होने के बाद अब कार्रवाई की बात सामने आने से निगम की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।



