सीजी भास्कर, 25 मई : छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने नया मोड़ ले लिया है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव (TS Baba News) को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
अजय चंद्राकर ने कहा कि अपमान की भी एक सीमा होती है और अब टीएस बाबा को यह तय करना चाहिए कि वे लगातार उपेक्षा सहते रहेंगे या अपने सम्मान और राजनीतिक विरासत के अनुरूप कोई बड़ा निर्णय लेंगे।
दरअसल, यह पूरा विवाद उस बयान के बाद और गहरा गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि वे टीएस सिंहदेव (TS Baba News) के बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देते। इसी बयान को आधार बनाते हुए अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही एक सुनियोजित तरीके से “टीएस बाबा को किनारे लगाने” की राजनीति शुरू हो गई थी।
चंद्राकर ने कहा कि टीएस सिंहदेव (TS Baba News) केवल एक नेता नहीं हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक सम्मानित और शालीन चेहरा माने जाते हैं। उनका संबंध एक गौरवशाली परिवार से है और प्रदेश के बड़े वर्ग में उनके प्रति सम्मान की भावना है। ऐसे में बार-बार सार्वजनिक तौर पर उनकी उपेक्षा होना केवल राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अपमान की तरह दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों का संघर्ष स्वाभाविक है, लेकिन किसी वरिष्ठ नेता को लगातार नजरअंदाज करना स्वस्थ परंपरा नहीं मानी जा सकती। भाजपा विधायक के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है।
इसी दौरान अजय चंद्राकर ने झीरम घाटी हमले को लेकर भी कांग्रेस नेताओं पर सवाल उठाए। झीरम घाटी हमले के 13 साल पूरे होने पर उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर आज भी कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब जनता जानना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि जिस दिन भूपेश बघेल अपने पास मौजूद तथ्यों को सार्वजनिक करेंगे और कवासी लखमा पूरी घटना पर खुलकर बात करेंगे, उस दिन कई परतें सामने आ जाएंगी।
चंद्राकर ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने अस्पताल में कवासी लखमा से क्या चर्चा की थी, यह भी जनता के सामने आना चाहिए। उनके मुताबिक कांग्रेस ने वर्षों तक इस दुखद घटना को संवेदनाओं से ज्यादा राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया।
भाजपा विधायक ने पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के उस बयान पर भी पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि खनिज संपदा में आदिवासियों को उचित हिस्सा मिलना चाहिए। चंद्राकर ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस सरकार के समय यह चिंता इतनी गंभीर थी, तो फिर इसे कैबिनेट, विधानसभा या केंद्र सरकार के सामने मजबूती से क्यों नहीं उठाया गया।
उन्होंने कहा कि जनता अब केवल बयान नहीं, बल्कि पुराने फैसलों और राजनीतिक नीयत का हिसाब भी देख रही है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह बयानबाजी ऐसे समय हो रही है, जब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर कई तरह की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं।



