सीजी भास्कर, 10 जुलाई : भारतीय सेना (Indian Army) अपनी पैदल सेना की युद्ध क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सेना ने 450 नए कार्ल गुस्ताफ मार्क-4 (84 मिमी) रॉकेट लॉन्चर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए अनुरोध प्रस्ताव (RFP) जारी कर दिया गया है। आधुनिक तकनीक से लैस ये लॉन्चर मौजूदा मार्क-3 सिस्टम की जगह लेंगे और हर तरह के मौसम में दुश्मन के टैंक, बख्तरबंद वाहनों और बंकरों को निशाना बनाने में सक्षम होंगे।
हल्के वजन के साथ अधिक मारक क्षमता
कार्ल गुस्ताफ मार्क-4 लॉन्चर का वजन 7 किलोग्राम से कम होगा, जिससे सैनिक इन्हें आसानी से लेकर दुर्गम इलाकों में भी ऑपरेशन कर सकेंगे। इसकी प्रभावी मारक क्षमता 350 मीटर से 800 मीटर तक होगी। आधुनिक डिजाइन और बेहतर तकनीक के कारण यह हथियार पैदल सैनिकों की फायरपावर को पहले से अधिक मजबूत बनाएगा।
लद्दाख से राजस्थान तक हर मौसम में होगा इस्तेमाल
सेना की ओर से तय की गई तकनीकी शर्तों के अनुसार यह रॉकेट लॉन्चर माइनस 20 डिग्री सेल्सियस से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में प्रभावी ढंग से काम करेगा। इसका मतलब है कि इसे लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों से लेकर राजस्थान के तपते रेगिस्तानी इलाकों तक बिना किसी तकनीकी बाधा के इस्तेमाल किया जा सकेगा।
भारतीय सेना की तैनाती देश के विभिन्न भौगोलिक और जलवायु वाले क्षेत्रों में रहती है। इसी कारण इस हथियार के लिए हर मौसम में विश्वसनीय प्रदर्शन करने की शर्त रखी गई है।
12 महीने में करनी होगी आपूर्ति
आरएफपी के मुताबिक, जिस कंपनी को यह अनुबंध मिलेगा, उसे 12 महीने के भीतर सभी 450 लॉन्चर भारतीय सेना को उपलब्ध कराने होंगे। इसके अलावा कंपनी को 15 वर्षों तक तकनीकी सहायता और 24 महीने की वारंटी भी देनी होगी, ताकि लंबे समय तक हथियारों का रखरखाव और संचालन सुचारु रूप से हो सके।
सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियां नहीं होंगी शामिल
रक्षा मंत्रालय ने निविदा प्रक्रिया में स्पष्ट कर दिया है कि भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियां इस खरीद प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगी। इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा खरीद नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेना की एंटी-टैंक क्षमता होगी और मजबूत
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नए कार्ल गुस्ताफ मार्क-4 लॉन्चर शामिल होने से भारतीय सेना की एंटी-टैंक, बंकर ध्वस्त करने और करीबी युद्ध की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात पैदल सैनिकों को आधुनिक हथियार मिलेंगे और सेना की परिचालन दक्षता तथा युद्धक तैयारी पहले से अधिक मजबूत होगी।



