सीजी भास्कर, 26 मई : आगामी मानसून (Flood Monitoring) और संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। Vikas Sheel की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय बाढ़ नियंत्रण समिति की अहम बैठक आयोजित हुई, जिसमें राहत व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टर्स और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्षों को मानसून 2026 को देखते हुए सुरक्षा और राहत व्यवस्था पूरी तरह चुस्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 1 जून से सभी जिलों को प्रतिदिन वर्षा की स्थिति और उससे होने वाली संभावित क्षति की रिपोर्ट शासन को भेजनी होगी। साथ ही प्रत्येक जिले में बाढ़ नियंत्रण के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य और जिला स्तर पर सक्रिय हुए कंट्रोल रूम
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग (Flood Monitoring) के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि प्रदेश में जून माह से मानसून सक्रिय होने की संभावना है। आपदा की स्थिति में त्वरित सहायता और समन्वय के लिए राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कर दिया गया है।
राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम के दूरभाष क्रमांक 0771-2223471 और 0771-2221242 जारी किए गए हैं। इसके अलावा सभी जिला मुख्यालयों में भी जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि बाढ़ और अतिवृष्टि की स्थिति में जनहानि को शून्य रखने के लक्ष्य के साथ सभी विभागों को अपनी जिम्मेदारियां तय करनी होंगी।
संवेदनशील इलाकों और बांधों पर चौबीसों घंटे नजर
जल संसाधन विभाग, नगर सेना और नागरिक सुरक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि हर साल बाढ़ से प्रभावित होने वाले निचले इलाकों की पहचान कर वहां चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए। बाढ़ बचाव उपकरणों और मोटरबोट्स की तत्काल मरम्मत कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में यह भी तय किया गया कि बड़े बांधों का जलस्तर बढ़ने पर पानी छोड़े जाने से कम से कम 12 घंटे पहले निचले जिलों और सीमावर्ती राज्यों को अलर्ट जारी करना अनिवार्य होगा।
राशन, दवाइयां और पेयजल की अग्रिम व्यवस्था
मुख्य सचिव ने खाद्य, स्वास्थ्य और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए कि पहुंचविहीन और संवेदनशील क्षेत्रों में राशन, नमक, केरोसिन और जीवनरक्षक दवाइयों का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित किया जाए। बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लिए विशेष चिकित्सा दलों के गठन के निर्देश भी दिए गए।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने तथा ब्लीचिंग पाउडर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जर्जर भवनों और नालियों पर विशेष फोकस
लोक निर्माण विभाग को कमजोर पुल-पुलियों, रपटों और सरकारी इमारतों की पहचान कर तत्काल मरम्मत करने के निर्देश दिए गए हैं। नगरीय निकायों को मानसून से पहले शहरों की सभी छोटी-बड़ी नालियों की सफाई लगातार जारी रखने को कहा गया है, ताकि जलभराव की स्थिति न बने।
मुख्य सचिव ने नगरीय क्षेत्रों में स्थित जर्जर और खतरनाक भवनों की निगरानी करते हुए वहां रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए।
किसानों तक पहुंचेगा मौसम का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी भारी वर्षा की चेतावनियों को समय पर जिला कंट्रोल रूम और आम जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को मोबाइल ऐप्स के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं बाढ़ से फसलों को होने वाले नुकसान का सर्वे राजस्व, कृषि और उद्यानिकी विभाग संयुक्त रूप से करेंगे।
मानसून 2026 (Flood Monitoring) को देखते हुए राज्य सरकार ने बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में 1 जून से सभी जिलों में दैनिक मॉनिटरिंग शुरू करने, संवेदनशील क्षेत्रों और बड़े जलाशयों पर 24 घंटे नजर रखने तथा राहत एवं बचाव व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए।



