सीजी भास्कर, 27 मई। सोशल मीडिया दिग्गज Meta Platforms को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उस अपील को सुनने से इनकार कर दिया जिसमें कंपनी इंस्टाग्राम एडिक्शन मामले से जुड़े मुकदमे को रुकवाना चाहती थी। इस फैसले के बाद अब मेटा के खिलाफ चल रहा मुकदमा जारी रहेगा और कंपनी की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। (Instagram Addiction Case)
सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी मेटा की दलील : Instagram Addiction Case
मेटा ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि वर्मोंट राज्य की अदालतों को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। कंपनी का कहना था कि इंस्टाग्राम के फीचर्स वर्मोंट में डिजाइन नहीं किए गए और ना ही वहां कथित भ्रामक जानकारी तैयार की गई।हालांकि निचली अदालत ने पहले ही इस मामले को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद मुकदमा जारी रहेगा। इस फैसले को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और सोशल मीडिया रेगुलेशन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
किशोरों को लत लगाने का आरोप
वर्मोंट की अटॉर्नी जनरल चैरिटी क्लार्क ने साल 2023 में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आरोप है कि इंस्टाग्राम को इस तरह डिजाइन किया गया जिससे किशोर और कम उम्र के यूजर्स लंबे समय तक ऐप पर बने रहें।शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने युवाओं की मानसिक और मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का अध्ययन कर ऐसे फीचर्स तैयार किए जो उन्हें बार-बार ऐप इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ने का दावा किया गया है।
मार्क जुकरबर्ग ने आरोपों से किया इनकार : Instagram Addiction Case
इस मामले में Mark Zuckerberg पहले भी सफाई दे चुके हैं। कैलिफोर्निया में चल रहे सोशल मीडिया एडिक्शन ट्रायल के दौरान उन्होंने कहा था कि इंस्टाग्राम बच्चों को निशाना नहीं बनाता और कंपनी यूजर्स की सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रही है।मेटा का कहना है कि वह पैरेंटल कंट्रोल, स्क्रीन टाइम लिमिट और सेफ्टी टूल्स जैसे कई फीचर्स पहले ही लागू कर चुकी है।
42 राज्यों की संयुक्त कार्रवाई से बढ़ा दबाव
यह मामला सिर्फ वर्मोंट तक सीमित नहीं है। अमेरिका के 42 राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ संयुक्त कानूनी कार्रवाई कर चुके हैं।




