सीजी भास्कर, 28 मई : क्या बिलासपुर के आसमान छूते ट्रैफिक और धूल के गुबार से परेशान जनता को कभी राहत मिलेगी? क्या सालों-साल खिंचने वाले सड़क निर्माण (PWD Infrastructure Inspection) के प्रोजेक्ट्स कभी वक्त पर पूरे होंगे? इन सुलगते सवालों के बीच छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों से एक बेहद आक्रामक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। लोक निर्माण विभाग के शीर्ष नेतृत्व ने अब दफ्तरों की ऐशो-आराम वाली कुर्सी छोड़कर सीधे जमीनी हकीकत को टटोलना शुरू कर दिया है। विभाग के कड़े तेवरों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद सचिव बिलासपुर की सड़कों पर धूल फांकते नजर आए। सरकार ने साफ कर दिया है कि जनता के पैसे का मखौल उड़ाने वाले ठेकेदारों और कागजी फाइलें दौड़ाने वाले सुस्त अफसरों के दिन अब लद चुके हैं। इस औचक और कड़े एक्शन से बिलासपुर संभाग के महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब काम की रफ्तार ही अफसरों की कुर्सी का फैसला करेगी।
पीडब्लूडी के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज बिलासपुर में नेहरू चौक से दर्रीघाट तक बन रहे 10 किलोमीटर लंबे फोरलेन सड़क के निर्माण कार्यों का खुद मौके पर पहुंचकर बारीकी से निरीक्षण किया। यहाँ जब उन्होंने जमीन पर काम की कछुआ चाल देखी, तहाँ उनके तेवर बेहद सख्त हो गए। उन्होंने मौके पर ही मौजूद वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की क्लास लगा दी और काम में तत्काल तेजी लाते हुए इसे जल्द से जल्द पूरा करने की कड़ी हिदायत दी। सचिव का यह ऑन-स्पॉट तेवर सीधे तौर पर उस पुराने और ढर्रे वाले सिस्टम पर करारा प्रहार है जहाँ प्रोजेक्ट्स सालों-साल अधूरे लटके रहते थे। इस आक्रामक निरीक्षण (PWD Infrastructure Inspection) के तुरंत बाद उन्होंने आला अफसरों की एक आपात समीक्षा बैठक भी बुलाई, जिसमें बिलासपुर जिले की तमाम महत्वपूर्ण सड़कों और भवनों के निर्माण की प्रगति का कच्चा-चिट्ठा खोला गया।
नहीं तो नपेंगे जिम्मेदार अफसर!
सरकारी निर्माण कार्यों में अक्सर देखा जाता है कि टेंडर पास होने के महीनों बाद तक ठेकेदार और इंजीनियर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। लेकिन बिलासपुर कलेक्ट्रेट में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सचिव ने लालफीताशाही के इस खेल को हमेशा के लिए खत्म करने का कड़ा नियम लागू कर दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी कार्य की निविदा (टेंडर) स्वीकृति के ठीक एक महीने के भीतर हर हाल में मैदान पर काम शुरू हो जाना चाहिए। यदि एक महीने के भीतर काम शुरू नहीं हुआ, तहाँ इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों और कार्यपालन अभियंताओं की जवाबदेही तय की जाएगी।
इस बार की प्लानिंग पूरी तरह से कॉर्पोरेट माडल पर आधारित दिखाई दे रही है। सचिव ने बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता से लेकर मैदानी स्तर के इंजीनियरों को साफ कहा है कि हर एक प्रोजेक्ट के अलग-अलग चरणों के लिए एक कड़क समय-सीमा (डेडलाइन) तय की जाए। अब किसी भी काम को अनिश्चितकाल के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। अफसरों को रोज निर्माण कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग करनी होगी और ठेकेदारों के साथ पल-पल का समन्वय बनाकर तय वक्त पर सड़कें जनता को सौंपनी होंगी। विभाग की कार्यशैली को पूरी तरह बदलने वाला यह सख्त माडल (PWD Infrastructure Inspection) अब उन ठेकेदारों के लिए चेतावनी है जो काम को लटकाकर बजट बढ़ाने की फिराक में रहते थे। इस बेहद अहम बैठक में बिलासपुर के कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, जिला पंचायत के सीईओ श्री संदीप अग्रवाल सहित लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी जैसे दिग्गज भी मौजूद थे।

गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं

गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
बैठक में केवल सड़कों की ही बात नहीं हुई, बल्कि बिलासपुर में चल रहे करोड़ों रुपये के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की भी एक-एक कर समीक्षा की गई। सचिव श्री बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभाग के डिक्शनरी में अब केवल दो ही शब्द सबसे ऊपर होने चाहिए—सर्वोत्तम गुणवत्ता और समय-सीमा में पूर्णता। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि सड़कों या भवनों के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने वाले ठेकेदारों को सीधे जेल भेजा जाएगा।
बैठक के दौरान कोनी-मोपका बायपास, जयरामनगर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), जयरामनगर-सीपत रोड बायपास जैसी महत्वपूर्ण परिवहन परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही न्यायधानी बिलासपुर की गरिमा से जुड़े छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में बन रहे भव्य ऑडिटोरियम, नए सर्वसुविधायुक्त जेल भवन और बोदरी में न्यायालयीन प्रकरणों के ओआईसी (ऑफिसर इन चार्ज) के लिए बनने वाले विश्राम भवन की कछुआ चाल पर नाराजगी जताई गई। राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवेज) के निर्माण की समीक्षा करते हुए सचिव ने कहा कि केंद्र और राज्य के तालमेल से चलने वाले इस निर्माण माडल (PWD Infrastructure Inspection) की रफ्तार को दोगुना किया जाए, ताकि बिलासपुर को चारों तरफ से चमचमाती कनेक्टिविटी मिल सके।
सिर्फ सड़क बनाना काफी नहीं
नेहरू चौक से दर्रीघाट तक बन रही 10 किलोमीटर की फोरलेन सड़क बिलासपुर शहर की नई लाइफलाइन बनने वाली है। इसी मानवीय और नागरिक पहलू को ध्यान में रखते हुए सचिव ने केवल डामर और कंक्रीट बिछाने तक सीमित रहने की सोच को खारिज कर दिया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान इंजीनियरों को कड़ा निर्देश दिया कि सड़कों को केवल वाहनों के चलने लायक ही न बनाएं, बल्कि उन्हें पूरी तरह से साफ, सुंदर और सुव्यवस्थित रखने का भी मुकम्मल इंतजाम करें।
सड़कों की खूबसूरती और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए उन्होंने फोरलेन के बीच बनने वाले डिवाइडर्स की दीवारों और सुरक्षा ग्रिल्स का तत्काल शानदार ढंग से रंग-रोगन (पेंटिंग) कराने के आदेश दिए। जहाँ पहले सड़कें बनने के बाद महीनों तक मलबे और गंदगी का ढेर लगा रहता था, तहाँ अब निर्माण के साथ-साथ सफाई की व्यवस्था को भी अनिवार्य कर दिया गया है। शहर के सौंदर्यीकरण का यह आधुनिक माडल (PWD Infrastructure Inspection) बिलासपुर की जनता को एक विश्वस्तरीय सड़क का अहसास कराएगा, जिससे दुर्घटनाओं में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।
लापरवाही की अब कोई जगह नहीं
इस आक्रामक समीक्षा बैठक का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अब नौकरशाही की सुस्ती को सरकार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करने वाली है। श्री मुकेश कुमार बंसल ने बिलासपुर परिक्षेत्र के दोनों मंडलों के अधीक्षण अभियंता, सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता तथा मैदानी स्तर के अनुविभागीय अधिकारियों को कड़े शब्दों में नसीहत दी। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी अपनी पुरानी सुस्त छवि को बदलें और पूरी सक्रियता, पारदर्शिता और गंभीरता से अपने दायित्वों को अंजाम दें।
अब वो पुराना दौर चला गया जब जनता को एक अदद सड़क के लिए सालों तक धूल खानी पड़ती थी। इस नई प्रशासनिक कसावट और कड़े माडल (PWD Infrastructure Inspection) ने यह साफ कर दिया है कि बिलासपुर के विकास कार्यों को अब एक नई और तीव्र रफ्तार मिलने जा रही है। बैठक की इस आक्रामकता के बाद अब मैदानी अफसरों के पसीने छूट रहे हैं क्योंकि उन्हें बहुत जल्द अपने-अपने क्षेत्रों की सड़कों की प्रगति रिपोर्ट सीधे रायपुर मुख्यालय भेजनी होगी। जनता की नजरें भी अब बिलासपुर के इस बदलते प्रशासनिक तेवर और आने वाले दिनों में दिखने वाले जमीनी नतीजों पर टिकी हुई हैं।




