सीजी भास्कर, 29 मई। बिलासपुर में ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर में बारकोड वाली रेडियम के नाम पर वसूली का आरोप है। यह भी आरोप है कि 2 हजार रुपए में लगने वाली रेडियम अब 2500 रुपए में लगाई जा रही है। विरोध के चलते दो दिनों से फिटनेस का काम प्रभावित है और करीब 40 गाड़ियां बिना फिटनेस के लौट गईं। बुधवार को वाहन मालिक और एजेंट इस मामले को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। (Recovery in the name of vehicle fitness)
- 40 गाड़ियों का नहीं हो सका फिटनेस
- छोटी-छोटी कमियों पर भी अतिरिक्त वसूली के आरोप
- बड़े नेता के करीबी और अफसर के रिश्तेदार को टेंडर : Recovery in the name of vehicle fitness
- एजेंटों के जरिए फिटनेस, मनमानी के आरोप
- बस एसोसिएशन पहले भी कर चुका शिकायत : Recovery in the name of vehicle fitness
- आरटीओ बोले- काम प्रभावित नहीं, सिंगल वेंडर से विवाद
वाहन मालिकों का आरोप है कि केवल एक एजेंट को ही बारकोड वाली रेडियम उपलब्ध कराने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा किसी अन्य एजेंट को न तो रेडियम लगाने की अनुमति है और न ही शासन की ओर से सप्लाई दी जा रही है। इसे लेकर मोनोपॉली सिंडिकेट पर सवाल उठने लगे हैं।
परिवहन विभाग के फिटनेस सेंटरों को लेकर वाहन मालिकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फिटनेस जांच के दौरान एक निजी कंपनी की रेडियम और बारकोड जबरन लगवाने का दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि कई वाहनों में पहले से मानक के अनुसार रेडियम लगा होने के बावजूद उसे अमान्य बताकर नया रेडियम लगवाने के लिए मजबूर किया जाता है।
वाहन मालिकों का कहना है कि नया रेडियम नहीं लगवाने पर फिटनेस प्रक्रिया में देरी की जाती है। इससे वाहन चालकों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
मनमानी वसूली को लेकर विरोध : Recovery in the name of vehicle fitness
परिवहन विभाग के ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर में मनमानी और अतिरिक्त वसूली को लेकर वाहन मालिकों और एजेंटों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बुधवार को बारकोड वाली रेडियम की कीमत बढ़ाने और सप्लाई को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ लोग शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम शिव बनर्जी ने फिटनेस सेंटर के जीएम को तलब किया है।
40 गाड़ियों का नहीं हो सका फिटनेस
फिटनेस सेंटर में पहले बारकोड वाली रेडियम 2 हजार रुपए में लगाई जा रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 2500 रुपए कर दिया गया है। स्थानीय एजेंटों का आरोप है कि रायपुर से केवल एक व्यक्ति को ही इसकी सप्लाई दी जा रही है, जबकि अन्य एजेंट उसी से रेडियम खरीदने को तैयार नहीं हैं।
विवाद के चलते बुधवार को केवल 2 गाड़ियों का ही फिटनेस हो सका, जबकि करीब 40 गाड़ियां बिना फिटनेस के वापस लौट गईं। इससे वाहन मालिकों और चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
छोटी-छोटी कमियों पर भी अतिरिक्त वसूली के आरोप
वाहन मालिकों ने फिटनेस सेंटर में अलग-अलग कारण बताकर अतिरिक्त रकम वसूलने का आरोप लगाया है। आरोप है कि विंडशील्ड में मामूली क्रेक होने पर 1000 रुपए, हाइवा का डाला ज्यादा मिलने पर 2000 रुपए, नंबर प्लेट गायब होने पर 1000 रुपए और इंडिकेटर-हेडलाइट खराब होने पर 500 रुपए लेकर गाड़ियों को पास किया जा रहा है।
बड़े नेता के करीबी और अफसर के रिश्तेदार को टेंडर : Recovery in the name of vehicle fitness
बस और ट्रक मालिकों का आरोप है कि बारकोड रेडियम का काम एक खास एजेंट को दिया गया है, जो सत्ताधारी दल के नेता और परिवहन विभाग के अफसर का रिश्तेदार है। सिर्फ वही एक मात्र एजेंट हैं बारकोड वाली रेडियम दे सकते हैं।
इसके अलावा किसी और एजेंट को न तो इसे लगाने की अनुमति है और ना ही उन्हें शासन से इसकी सप्लाई है। एजेंट, वाहन मालिकों के विरोध के बाद भी मुख्यालय में बैठे अफसरों ने सभी आरटीओ को इस विवाद से दूर रहने का मौखिक आदेश तक दे दिया है।
एजेंटों के जरिए फिटनेस, मनमानी के आरोप
फिटनेस सेंटर की कार्यप्रणाली को लेकर बस एसोसिएशन पहले भी कलेक्टर से शिकायत कर चुका है। एसोसिएशन का कहना है कि जबरन इमरजेंसी विंडो और महंगे रेडियम के नाम पर वाहन मालिकों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
वहीं, वाहन मालिकों का कहना है कि बिलासपुर में फिटनेस का पूरा काम एजेंटों के जरिए होता है। सीधे वाहन मालिक अपनी गाड़ियों का फिटनेस नहीं करा सकते। ऐसे में हर साल अनिवार्य फिटनेस की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है।
बस एसोसिएशन पहले भी कर चुका शिकायत : Recovery in the name of vehicle fitness
बिलासपुर बस एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन जूनेजा ने बताया कि फिटनेस सेंटर में मनमानी और अतिरिक्त वसूली को लेकर बस एसोसिएशन पहले भी कलेक्टर से शिकायत कर चुका है। बुधवार को फिर बारकोड रेडियम को लेकर विवाद हुआ।
कुछ लोग शिकायत लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे थे। विवाद के कारण दो दिन से फिटनेस का काम प्रभावित है और बुधवार को करीब 40 गाड़ियां बिना फिटनेस लौट गईं।
आरटीओ बोले- काम प्रभावित नहीं, सिंगल वेंडर से विवाद
जिला परिवहन अधिकारी (RTO) असीम माथुर ने बताया कि बुधवार को थोड़ा विवाद जरूर हुआ था, लेकिन फिटनेस का काम प्रभावित नहीं है। जानकारी मिली है कि हर जिले में सिंगल वेंडर होने की वजह से विवाद की स्थिति बन रही है।
पूरे मामले की जानकारी मुख्यालय भेज दी गई है। वहां से जो निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुसार आगे निर्णय लिया जाएगा।




