सीजी भास्कर, 29 मई। बिलासपुर में वाहन फिटनेस से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर इन दिनों नाराजगी का माहौल देखने को मिल (Vehicle Fitness) रहा है। फिटनेस सेंटर पहुंचने वाले वाहन मालिकों और एजेंटों ने ऐसी शिकायतें सामने रखी हैं, जिनके बाद पूरे मामले की चर्चा तेज हो गई है। पिछले दो दिनों से फिटनेस कार्य प्रभावित होने की बात कही जा रही है, जिससे कई वाहन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
फिटनेस केंद्र के बाहर लगातार बढ़ती भीड़ और शिकायतों के बीच मामला प्रशासन तक पहुंच गया। वाहन संचालकों का कहना है कि कुछ नियमों और शुल्कों को लेकर भ्रम की स्थिति है, जबकि एजेंटों ने भी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। विवाद बढ़ने के बाद अधिकारियों ने मामले की जानकारी लेना शुरू कर दिया है।
बारकोड रेडियम को लेकर विवाद : Vehicle Fitness
वाहन मालिकों का आरोप है कि फिटनेस प्रक्रिया के दौरान बारकोड वाली रेडियम अनिवार्य बताई जा रही है। उनका कहना है कि पहले जहां यह सामग्री कम कीमत पर उपलब्ध थी, वहीं अब इसके लिए अधिक राशि ली जा रही है।
कुछ लोगों का दावा है कि केवल एक एजेंट को ही इसकी आपूर्ति और उपलब्धता की अनुमति मिली हुई है। इसी वजह से प्रतिस्पर्धा खत्म होने और एकाधिकार जैसी स्थिति बनने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
पहले से लगी सामग्री को बताया जा रहा अमान्य
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई वाहनों में पहले से मानकों के अनुरूप रेडियम लगी हुई है, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया जा रहा। आरोप है कि वाहन मालिकों पर नई सामग्री लगवाने का दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि यदि नया रेडियम नहीं लगवाया जाए तो फिटनेस प्रक्रिया में देरी होने लगती है, जिससे समय और धन दोनों का नुकसान होता है।
कलेक्ट्रेट तक पहुंचा मामला
विवाद बढ़ने के बाद वाहन मालिक और एजेंट शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट (Vehicle Fitness) पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है। कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम शिव बनर्जी ने फिटनेस सेंटर के महाप्रबंधक को तलब कर पूरे मामले की जानकारी मांगी है। इससे उम्मीद की जा रही है कि विवाद के कारणों की जांच की जाएगी।
कई वाहन बिना फिटनेस लौटे
विवाद का असर फिटनेस कार्य पर भी देखने को मिला। वाहन संचालकों का कहना है कि बड़ी संख्या में वाहन फिटनेस प्रमाणन नहीं करा सके और उन्हें वापस लौटना पड़ा। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान होने की बात भी सामने आई है। वाहन मालिकों का कहना है कि समय पर फिटनेस नहीं होने से उनके कामकाज पर असर पड़ रहा है।
अतिरिक्त शुल्क लेने के आरोप
कुछ वाहन मालिकों ने आरोप लगाया है कि छोटी छोटी तकनीकी कमियों के नाम पर अतिरिक्त रकम ली जा रही है। अलग अलग कारण बताकर अतिरिक्त भुगतान करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायतकर्ताओं ने इसकी जांच की मांग की है।
एक एजेंट को लाभ पहुंचाने का आरोप
बस और ट्रक संचालकों ने आरोप लगाया है कि बारकोड रेडियम का काम केवल एक विशेष एजेंट के माध्यम से कराया जा रहा है। इसी कारण अन्य एजेंटों और वाहन मालिकों में नाराजगी (Vehicle Fitness) बढ़ी है। उनका कहना है कि यदि अधिक एजेंटों को अनुमति मिले तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वाहन मालिकों को राहत मिल सकेगी।
विभाग ने भेजी रिपोर्ट
जिला परिवहन अधिकारी असीम माथुर ने बताया कि विवाद की जानकारी मिली है और पूरे मामले की रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि स्थिति को लेकर उच्च स्तर पर विचार किया जाएगा। विभाग का कहना है कि मुख्यालय से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।




