सीजी भास्कर, 29 मई : छत्तीसगढ़ और ओडिशा की जीवनदायिनी मानी जाने वाली पावन महानदी के उद्गम क्षेत्र ‘नगरी-सिहावा’ को अब एक नई और भव्य पहचान मिलने जा रही है। प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर और अगाध धार्मिक आस्था को अपने आंचल में समेटे इस क्षेत्र को पर्यटन के मानचित्र पर मजबूती से उभारने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। इसी कड़ी में धमतरी के कलेक्टर ने नगरी विकासखंड के ग्राम फारसिया स्थित प्रसिद्ध महामाया मंदिर परिसर का दौरा कर वहां चल रहे सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया।
- महामाया मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
- 17 किलोमीटर लंबा महानदी संरक्षण अभियान
- 20 करोड़ की लागत से संवरेगा सप्तऋषि क्षेत्र और गणेश घाट
- परियोजना की प्रमुख रूपरेखा और संभावित लाभ
- घाटों का सौंदर्यीकरण : गणेश घाट संगम स्थल का व्यापक सौंदर्यीकरण किया जाएगा, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगा।
- मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर : आधारभूत संरचना के विकास से यहां आने वाले आगंतुकों को विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी।
- सुविधाओं का विस्तार : जनभावनाओं के अनुरूप पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर आवागमन सुगम होगा।
- स्थानीय युवाओं को मिलेंगे रोजगार के नए अवसर
महामाया मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
महामाया मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने और स्थल के आकर्षण को दोगुना करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। परिसर को रोशन करने के लिए सोलर लाइट स्थापना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा मंदिर परिसर में पेवर ब्लॉक निर्माण, आकर्षक पार्क का विकास, श्रद्धालुओं के बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था और नारियल के पौधों का रोपण किया जा रहा है। हाल ही में परिसर स्थित पवित्र कुंड की सघन साफ-सफाई की गई है। कलेक्टर ने इस ऐतिहासिक कुंड की आवश्यक मरम्मत और संरक्षण कार्य को समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इसकी धार्मिक गरिमा अक्षुण्ण रहे।
17 किलोमीटर लंबा महानदी संरक्षण अभियान
महानदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि इस पूरे अंचल की संस्कृति और जीवन का आधार है। जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और मेघा फाउंडेशन के त्रिकोणीय सहयोग से लगभग 17 किलोमीटर के दायरे में महानदी स्वच्छता एवं संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इस महाअभियान के तहत नदी के तटों की व्यापक सफाई की जा रही है और पर्यावरण को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर नारियल के पौधे रोपे जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थल के संरक्षण और विकास का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना है।
20 करोड़ की लागत से संवरेगा सप्तऋषि क्षेत्र और गणेश घाट
नगरी-सिहावा को पर्यटन का मुख्य केंद्र बनाने के लिए प्रशासन ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत ₹20 करोड़ की लागत से संगम स्थल गणेश घाट, गणेश्वर मंदिर और सप्तऋषि क्षेत्र का कायाकल्प किया जाएगा।
परियोजना की प्रमुख रूपरेखा और संभावित लाभ
घाटों का सौंदर्यीकरण : गणेश घाट संगम स्थल का व्यापक सौंदर्यीकरण किया जाएगा, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगा।
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर : आधारभूत संरचना के विकास से यहां आने वाले आगंतुकों को विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी।
सुविधाओं का विस्तार : जनभावनाओं के अनुरूप पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर आवागमन सुगम होगा।
स्थानीय युवाओं को मिलेंगे रोजगार के नए अवसर
इस पूरी परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा जुड़ाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को एक नई रफ्तार मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, होमस्टे, हस्तशिल्प और दुकानदारी जैसे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण और स्थानीय व्यापार को मजबूती मिलेगी।




