सीजी भास्कर, 29 मई : धमतरी जिले के एक गांव से सामने आई तस्वीरों ने लोगों को झकझोर कर रख (Illegal Sand Mining) दिया है। जिस जगह को अंतिम संस्कार और मृतकों की स्मृति से जोड़ा जाता है, वहां का दृश्य देखकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है। आरोप है कि लगातार हो रहे अवैध रेत उत्खनन ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि श्मशान घाट की जमीन ही असुरक्षित हो गई।
घटना सामने आने के बाद गांव में आक्रोश बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से नदी किनारे मशीनों और वाहनों के जरिए रेत निकाली जा रही थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से हालात अब गंभीर रूप ले चुके हैं।
श्मशान घाट तक पहुंचा अवैध उत्खनन का असर : Illegal Sand Mining
मामला धमतरी जिले के खरेंगा गांव का बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार महानदी किनारे अवैध रेत उत्खनन के चलते कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। बताया जा रहा है कि लगातार मिट्टी खिसकने और कटाव बढ़ने से नदी किनारे स्थित श्मशान घाट का हिस्सा भी प्रभावित हुआ, जिससे जमीन धंसने लगी।
बाहर आने लगे मानव अवशेष
ग्रामीणों का दावा है कि जमीन धंसने के बाद वहां दफन मानव अवशेष और कंकाल बाहर दिखाई देने लगे। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक कई मानव अवशेष सामने आ चुके हैं, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों में भारी नाराजगी
घटना के बाद गांव के लोगों ने अवैध उत्खनन के खिलाफ कड़ा विरोध (Illegal Sand Mining) जताया है। उनका आरोप है कि लंबे समय से इस गतिविधि की जानकारी संबंधित विभागों को दी जा रही थी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल पर्यावरणीय नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं से भी जुड़ा गंभीर विषय है।
विभागीय कार्रवाई पर उठे सवाल
मामले के सामने आने के बाद संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि कार्रवाई तब शुरू हुई जब मामला चर्चा में आया। स्थानीय स्तर पर कुछ वाहनों को जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि केवल इतनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अवैध उत्खनन से जुड़े वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों का यह भी कहना है कि सिर्फ वाहनों की जब्ती से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी है।
पर्यावरण और सुरक्षा दोनों पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित रेत उत्खनन से नदी का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है। इसके कारण कटाव बढ़ता है और आसपास की जमीन कमजोर होने लगती है। ऐसी गतिविधियां भविष्य में और बड़े नुकसान की वजह बन सकती हैं, इसलिए समय रहते नियंत्रण और निगरानी बेहद जरूरी मानी जा रही है।
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर
घटना के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी (Illegal Sand Mining) हुई हैं। ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।




