सीजी भास्कर, 30 मई : एक दौर था जब बाजारों में टमाटर की कीमतें आसमान छूने लगी थीं, तो देश के कोने-कोने से टमाटरों की डकैती की अजीबोगरीब और सनसनीखेज खबरें सुर्खियां बनती थीं। लेकिन अब, पूरे प्रदेश में यूरिया की मची भारी किल्लत और ब्लैक मार्केट में बढ़ी इसकी डिमांड के बीच लुटेरों ने उस ‘काले सोने’ पर डाका डाल दिया है जिसके दम पर हरी-भरी फसलें खेतों में लहलहाती हैं।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के कुसुमकसा क्षेत्र से अन्नदाता की छाती पर मूंग दलने वाली एक ऐसी ही खौफनाक और दुस्साहसिक वारदात सामने आई है। ग्राम चिपरा स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के उपकेंद्र में आधी रात को घुसे अज्ञात डकैतों ने सुनियोजित तरीके से धावा बोलते हुए 60 बोरी कीमती खाद पर हाथ साफ कर दिया। खरीफ सीजन के ठीक पहले हुई इस अप्रत्याशित चोरी (Balod Fertilizer Theft) ने न केवल पुलिसिया गश्त के दावों का जनाजा निकाल दिया है, बल्कि अपनी ही माटी पर पसीना बहाने वाले बेबस किसानों की नींद उड़ा दी है।
यह कोई साधारण सामान की चोरी नहीं है, बल्कि पूरे सहकारिता नेटवर्क और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी को कटघरे में खड़ा करता है। प्रदेश भर में खाद की किल्लत का फायदा उठाने के लिए अब खाद माफिया सक्रिय हो चुका है, और चोरों को इस बात का बखूबी अंदाजा था कि मानसून के दस्तक देते ही इस संकट के बीच खाद सोने से भी ज्यादा कीमती हो जाएगी। इस सुनियोजित डकैती (Balod Fertilizer Theft) के बाद से चिपरा और आसपास के वनांचल गांवों में तनाव और सन्नाटा पसर गया है, क्योंकि जिस खाद के भरोसे वे अपने बच्चों का पेट पालने की उम्मीद जगाए बैठे थे, उसे शातिर चोर पलक झपकते ही उड़ा ले गए।
इस तरह खुला खौफनाक हकीकत
इस गहरे राज का खुलासा शनिवार की सुबह उस वक्त हुआ जब गांव का एक सीधा-साधा किसान अपनी दिनचर्या के तहत घुरुवा के पास कचरा फेंकने गया था। सुबह की धुंध और ठंडी हवाओं के बीच जैसे ही उसकी नजर गोदाम के मुख्य चैनल गेट पर पड़ी, उसका खून जम गया। लोहे का भारी-भरकम गेट आधा खुला हुआ था और उसका ताला कटर से बेरहमी से काटा जा चुका था। किसी बड़ी अनहोनी के डर से कांपते हुए जब उसने गोदाम के भीतर कदम रखा, तो वहां का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। कतारों में सजी हुई खाद की बोरियां वहां से पूरी तरह नदारद थीं।
उसने चीखते हुए गांव के कोटवार और समिति प्रबंधन को इस खौफनाक मंजर की जानकारी दी। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों लाचार किसानों का हुजूम इकट्ठा हो गया। उपकेंद्र के प्रबंधक भीखम लाल ने जब कांपते हाथों से स्टॉक रजिस्टर का मिलान किया, तो कुल 60 बोरी खाद गायब पाई गई। किल्लत के इस दौर में हुई इस अभूतपूर्व चोरी (Balod Fertilizer Theft) ने किसानों की रूह को झकझोर कर रख दिया है। सहकारी समिति के इतिहास में यह पहली ऐसी वारदात है जहां अन्नदाता के हक पर इस तरह डाका डाला गया हो।
जमीन पर छूटा कटर, रुमाल और पिकअप का एंगल
घटना की सूचना मिलते ही बालोद पुलिस की स्पेशल टीम डॉग स्क्वॉड के साथ मौके पर पहुंची। घटनास्थल का बारीकी से मुआयना करने पर जमीन से एक चालू हालत में छूटी हुई टॉर्च, एक इस्तेमाल किया हुआ रुमाल और लोहे की पिकअप गाड़ी की ट्रॉली का एंगल बरामद हुआ है। इन अहम सुरागों ने पुलिस के आला अफसरों के होश उड़ा दिए हैं। साफ जाहिर है कि चोर आधी रात को एक बड़ा मालवाहक वाहन लेकर आए थे और चोरों की तादाद कम से कम 5 से 6 रही होगी, जिन्होंने बेहद कम समय में इन भारी-भरकम बोरियों को गाड़ी में लादा और भाग निकले। इस शातिर अंदाज (Balod Fertilizer Theft) ने पुलिस की चौकसी पर भी एक बड़ा आक्रामक प्रहार किया है।
इस पूरे कांड का सबसे कड़वा सच यह है कि इतने बड़े गोदाम में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था, जिससे अपराधियों की पहचान करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। बिना सुरक्षा कैमरों के गोदाम को लावारिस छोड़ देना सीधे तौर पर चोरों को न्योता देने जैसा था। फिलहाल, पुलिस की टीमें हाईवे और आसपास के पेट्रोल पंपों पर लगे कैमरों के फुटेज खंगाल रही हैं। खरीफ की बुआई से ठीक पहले किसानों के भरोसे को जो चोट पहुंची है, उसकी भरपाई करना अब प्रशासन के लिए साख का सवाल बन चुका है। ग्रामीण इलाकों में इस तरह खाद की चोरी होने की वारदात (Balod Fertilizer Theft) ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है और अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस इन शातिर चोरों के गिरेबान तक कब तक पहुंच पाती है।




