सीजी भास्कर, 30 मई : छत्तीसगढ़ में डीएड (D.Ed) उत्तीर्ण बेरोजगार युवाओं की सरकारी स्कूलों में सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति की मांग को लेकर अब प्रदेश की सियासत में एक बहुत बड़ा और आक्रामक मोड़ आ गया है। पिछले 153 दिनों से राजधानी रायपुर के बूढ़ातालाब और तूता धरना स्थल पर अपनी जायज मांगों के लिए कड़ाके की ठंड और तपती धूप में बैठे इन अभ्यर्थियों के समर्थन में अब आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार के खिलाफ सीधे मोर्चेबंदी कर दी है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने इस संवेदनशील मामले को लेकर सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को एक कड़ा पत्र लिखा है। पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर 10 जून तक इन पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति का आदेश जारी नहीं किया गया, तो वे स्वयं 11 जून से आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। इस बड़े राजनीतिक कदम (AAP Deled Protest) के बाद से स्कूल शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है, क्योंकि बेरोजगार युवाओं का यह दर्द अब एक बड़े आंदोलन का रूप अख्तियार कर रहा है।
दरअसल, यह पूरा मामला केवल एक राजनीतिक स्टंट नहीं है, बल्कि इसके पीछे 2300 से अधिक परिवारों के भविष्य का एक गहरा सस्पेंस और मानवीय संकट छुपा हुआ है। आप नेता उत्तम जायसवाल ने दावा किया है कि राज्य में वर्तमान में सहायक शिक्षकों के करीब 2300 से अधिक पद पूरी तरह खाली पड़े हैं, जिनमें से लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) महिला और पुरुष वर्ग के अभ्यर्थियों के हैं।
इन पदों पर भर्ती की सारी प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद इन्हें ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिया जा रहा है। नियुक्ति में हो रही इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रदेश के हजारों होनहार युवा पिछले पांच महीनों से दाने-दाने को मोहताज होकर सड़कों पर सो रहे हैं। इस अमानवीय विफलता के कारण युवाओं को हो रहे आर्थिक नुकसान (AAP Deled Protest) को देखते हुए अब यह आंदोलन पूरी तरह से आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो चुका है।
कोर्ट के आदेशों को ठेंगा दिखाने का आरोप
इस पूरे आंदोलन का सबसे कड़ा और आक्रोशित करने वाला पहलू यह है कि अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्ति के लिए देश की सबसे बड़ी अदालतों का दरवाजा भी खटखटाया था। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उत्तम जायसवाल ने यह गंभीर आरोप लगाया है कि देश के माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) और सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के स्पष्ट आदेशों और निर्देशों के बावजूद राज्य का शिक्षा विभाग इस प्रक्रिया को दबाकर बैठा है। लोकतांत्रिक देश में न्यायालय के आदेशों के ढर्रे में ऐसा नकारात्मक बदलाव (AAP Deled Protest) पूरी तरह से तानाशाही को दर्शाता है। सरकार को न्यायपालिका के निर्देशों का सम्मान करते हुए तुरंत योग्य युवाओं को स्कूलों में पदस्थ करना चाहिए, ताकि प्रदेश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था को भी सुधारा जा सके।
परिजनों और अभ्यर्थियों का रोना इस बात पर है कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले इन युवाओं की आवाज को पुलिसिया तंत्र के दम पर कुचलने का प्रयास किया गया। पत्र में यह सनसनखेज खुलासा किया गया है कि धरना प्रदर्शन के दौरान इन मासूम अभ्यर्थियों को कई बार बर्बरतापूर्वक गिरफ्तार किया गया, उन्हें अपराधियों की तरह तीन बार जेल भेजा गया और चार दिनों तक अवैध रूप से पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया। सरकार के इस दमनकारी नियम (AAP Deled Protest) के बावजूद अभ्यर्थियों ने अपना हौसला नहीं खोया और अपनी जायज मांगों के लिए मैदान में डटे रहे। मानसिक और सामाजिक दबाव के कारण कई अभ्यर्थियों की मानसिक स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी है, जिसे आप नेता ने एक गंभीर मानवीय त्रासदी करार दिया है।
11 जून से भूख हड़ताल का अल्टीमेटम
तूता धरना स्थल पर बैठे आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले 153 दिनों से केवल आश्वासन का कड़वा घूंट पी रहे हैं, लेकिन अब उनके सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है। उत्तम जायसवाल ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस मामले में खुद संज्ञान लें और एक संवेदनशील मुखिया की तरह इन गरीब और आदिवासी युवाओं के हित में फैसला सुनाएं।
अब सबसे बड़ा सस्पेंस और चुनौती यह है कि क्या 10 जून की तय समय सीमा से पहले शिक्षा विभाग इन 2300 खाली पदों पर रुकी हुई नियुक्ति प्रक्रिया की गति (AAP Deled Protest) को तेज कर ज्वाइनिंग लेटर जारी करेगा, या फिर 11 जून से रायपुर की धरती पर आम आदमी पार्टी का यह अनिश्चितकालीन आमरण अनशन सरकार की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा देगा? उत्तम जायसवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि यह भूख हड़ताल तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक आखिरी पात्र डीएड अभ्यर्थी को सरकारी स्कूल में शिक्षक की कुर्सी नहीं मिल जाती। बहरहाल, इस अल्टीमेटम ने छत्तीसगढ़ की राजनीति के तापमान को बढ़ा दिया है और अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री सचिवालय के अगले कदम पर टिकी हैं।




