सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले महकमे (Jashpur Police Action Case) के भीतर ही अनुशासनहीनता बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ एक बहुत बड़ा कूटनीतिक एक्शन लिया गया है। पुलिस विभाग में लगातार बिना सूचना के गायब रहने और मनमर्जी चलाने वाले कर्मचारियों पर सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) ने अब तक की सबसे बड़ी और कड़ाई से दंडात्मक कार्रवाई की है। इस पूरे एक्शन का सस्पेंस तब खत्म हुआ जब विभागीय जांच की रिपोर्ट सामने आई और एसएसपी ने पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक साथ कड़ा फरमान जारी कर दिया। इस बड़े फैसले के बाद से पूरे जशपुर जिले के पुलिस बेड़े में हड़कंप मच गया है।
दरअसल, पूरा मामला पुलिस विभाग की साख और अनुशासन से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से कुछ आरक्षक बिना किसी पूर्व सूचना या उच्च अधिकारियों की स्वीकृति के अपनी ड्यूटी (Jashpur Police Action Case) से लगातार नदारद चल रहे थे। एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ कर दिया है कि पुलिस महकमे में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन तीन पुलिसकर्मियों को सेवा से सीधे पृथक यानी बर्खास्त किया गया है, उनमें आरक्षक संतोष राम, नेल्सन तिग्गा और अशोक एक्का शामिल हैं। ये तीनों आरक्षक (Jashpur Police Action Case) महीनों से गायब थे और इनके खिलाफ काफी समय से विभागीय जांच चल रही थी, जिसकी प्रक्रिया पूरी होते ही इन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
इसी कार्रवाई (Jashpur Police Action Case) की जद में दो अन्य पुराने आरक्षक भी आए हैं, जिन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में अनुशासन की धज्जियां उड़ाई थीं। आरक्षक इरीमियस कुजूर अपनी 17 वर्ष की नौकरी के दौरान कुल 139 दिन बिना बताए गायब रहा था। इतना ही नहीं, उसे पहले भी अलग-अलग मामलों में 2 छोटी और 2 बड़ी विभागीय सजाएं मिल चुकी थीं। इस बार जांच के बाद एसएसपी ने उसकी एक साल की वेतन वृद्धि रोकने का कड़ा आदेश जारी किया है।
वहीं, दूसरा बड़ा एक्शन आरक्षक विंदेश्वर राम पर हुआ है, जो अपने 18 साल के सेवाकाल में रिकॉर्ड 216 दिन गैर-हाजिर रहा। विंदेश्वर को उसके पूरे करियर में अलग-अलग मामलों में 6 बार पहले भी विभागीय सजा दी जा चुकी थी। इसके बावजूद उसके ढर्रे में कोई सुधार नहीं आया, जिसके बाद एसएसपी ने इस आरक्षक को सीधे न्यूनतम वेतनमान पर डिमोट (पदावनत) कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई का सीधा असर आरक्षक के सेवानिवृत्त होने पर मिलने वाली पेंशन की राशि पर भी कड़ाई से पड़ेगा।
एसएसपी द्वारा पुलिसिंग की व्यवस्था (Jashpur Police Action Case) को सुधारने के लिए उठाए गए इस सख्त कदम से उन कर्मचारियों में भारी खलबली है जो ड्यूटी को हल्के में लेते हैं। इस पूरी बड़ी कार्रवाई के बाद विभाग ने सख्त लहजे में संदेश दिया है कि जनता की सुरक्षा में तैनात बल अगर खुद अनुशासनहीन रहेगा तो उस पर विधिक हंटर चलना तय है। फिलहाल इस कड़े आदेश के बाद से पूरे महकमें में अफरा-तफरी की स्थिति बनी हुई है।




