सीजी भास्कर, 01 जून : छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों के किचन का मासिक बजट (CG Milk Price Hike) एक बार फिर बुरी तरह से डगमगाने वाला है। प्रदेश में लगातार पैर पसार रही कमरतोड़ महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की जेब पर बहुत ही करारा और सीधा प्रहार किया है। पेट्रोल, डीजल और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं के दामों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी की मार से जनता अभी संभल भी नहीं पाई थी कि अब सुबह की चाय और बच्चों के पोषण का मुख्य आधार यानी दूध भी काफी महंगा हो गया है।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत संचालित होने वाले छत्तीसगढ़ के सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय ‘देवभोग’ ब्रांड ने अपने दूध और अन्य सभी डेयरी उत्पादों की कीमतों में तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस नए संशोधन और नई दरें लागू होने के बाद, अब सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के हर आम और खास उपभोक्ता को प्रति लीटर दूध की खरीदी के लिए अपनी जेब से पहले के मुकाबले अधिक रुपयों का भुगतान करना होगा। बढ़ती कीमतों का यह दौर राज्य में (CG Milk Price Hike) के रूप में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक नई और बड़ी चिंता बनकर सामने आया है।
जानिए अब आपकी जेब से कितने ज्यादा पैसे कटेंगे
अगर आप भी रोज सुबह देवभोग दूध के पैकेट खरीदते हैं, तो आपको इस नए रेट कार्ड को बहुत ही ध्यान से समझ लेना चाहिए। देवभोग प्रबंधन द्वारा जारी की गई नई दरों के अनुसार, सबसे ज्यादा बिकने वाले देवभोग के सामान्य दूध (टोंड/स्टैंडर्ड) की कीमत में सीधे 2 रुपये प्रति लीटर की तगड़ी बढ़ोतरी की गई है। इस निर्णय के बाद, जो सामान्य दूध पहले बाजार में उपभोक्ताओं को 57 रुपये प्रति लीटर की दर से आसानी से मिल रहा था, वही दूध अब 2 रुपये महंगा होकर 59 रुपये प्रति लीटर की नई कीमत में उपलब्ध होगा। इसके साथ ही, देवभोग के प्रीमियम सेगमेंट में आने वाले ‘गोरस दूध’ की कीमतों में भी बदलाव किया गया है, जिसके बाद अब गोरस दूध की कीमत बढ़कर सीधे 58 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई है। इन नए और बढ़े हुए रेट्स के पूरी तरह से प्रभावी होने के बाद, छत्तीसगढ़ के उन लाखों परिवारों का मासिक खर्च काफी हद तक बढ़ जाएगा, जिनके घरों में छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से हर दिन दो से तीन लीटर दूध की खपत होती है। इस अचानक आई मूल्य वृद्धि ने राज्य में (CG Milk Price Hike) की एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर आम जनता के सामने रख दी है।
रायपुर से बिलासपुर तक मचेगा हाहाकार
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर, औद्योगिक नगरी दुर्ग-भिलाई और राजनांदगांव समेत सूबे के लगभग सभी छोटे-बड़े प्रमुख शहरों में बहुत ही बड़ी संख्या में लोग हर सुबह पूरी तरह से सरकारी ब्रांड देवभोग दूध पर ही निर्भर रहते हैं। सरकारी नियंत्रण में होने के कारण लोग इसकी शुद्धता के साथ-साथ इसकी किफायती कीमतों पर भी पूरा भरोसा करते आए हैं। ऐसे में, अचानक से कीमतों में की गई इस भारी बढ़ोतरी का सीधा, तीखा और सबसे ज्यादा असर समाज के मध्यम वर्गीय और निम्न आय वर्ग वाले परिवारों की दैनिक अर्थव्यवस्था पर पड़ने की पूरी संभावना है।
चिलचिलाती गर्मी के इस कठिन मौसम में, जब आम इंसान पहले से ही बिजली बिल, महंगी सब्जियों और बच्चों की स्कूल फीस के भारी-भरकम बोझ तले बुरी तरह से दबा हुआ है, वैसे में दैनिक उपभोग की सबसे जरूरी वस्तु यानी दूध के दाम इस तरह बढ़ना उपभोक्ताओं की मानसिक चिंता को कई गुना और ज्यादा बढ़ा रहा है। गौरतलब है कि खुले बाजार में सक्रिय कई बड़ी निजी डेयरी कंपनियां पहले ही अपने ब्रांडेड दूध के दाम गुपचुप तरीके से काफी बढ़ा चुकी थीं। अब उनके बाद इस सरकारी उपक्रम देवभोग द्वारा भी अपनी कीमतों में यह बड़ा संशोधन किए जाने के बाद, गरीब और आम उपभोक्ताओं पर एक असहनीय अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ना पूरी तरह से तय माना जा रहा है। इस स्थिति ने आम जनता को (CG Milk Price Hike) के कड़वे सच को स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया है।
आखिर क्यों बढ़ाए गए दूध के दाम
आम जनता के बीच उठ रहे भारी आक्रोश और सवालों के बीच, डेयरी उद्योग और देवभोग प्रबंधन से जुड़े उच्च अधिकारियों ने इस मूल्य वृद्धि के पीछे की अपनी कई तकनीकी और व्यावहारिक मजबूरियों को मीडिया के सामने रखा है। अधिकारियों का साफ तौर पर कहना है कि पिछले कुछ महीनों में दूध की कुल उत्पादन लागत (प्रोडक्शन कॉस्ट) में बहुत ही भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही, देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई लगातार बढ़ोतरी के कारण पशुओं और दूध के परिवहन खर्च (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) में भी काफी ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रबंधन के मुताबिक, दुधारू पशुओं के लिए आने वाले चारे और विशेष आहार की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके अलावा, डेयरी प्लांट को चलाने में लगने वाली भारी बिजली, पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक सामग्री की बढ़ती लागत और लेबर चार्ज के बढ़ते दबाव के कारण पूरी डेयरी कंपनी पर वित्तीय संकट मंडरा रहा था। इसी भारी नुकसान और दबाव से उबरने के चलते, अंततः नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) को बेहद भारी मन से दूध और अन्य सभी डेयरी उत्पादों के दाम बढ़ाने का यह बेहद कड़ा और अप्रिय निर्णय लेना पड़ा है।
चूल्हे का स्वाद और बच्चों की सेहत दोनों होगी प्रभावित
दूध कोई विलासिता या शौक की वस्तु नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय घर की सबसे प्राथमिक और दैनिक अनिवार्य जरूरतों में सबसे ऊपर शामिल है। नवजात बच्चों के संपूर्ण शारीरिक विकास से लेकर, बीमार मरीजों और बुजुर्गों की सेहत की देखभाल तक, समाज का अधिकांश हिस्सा नियमित रूप से हर दिन दूध का उपभोग अनिवार्य रूप से करता ही है। ऐसे में, महज 2 रुपये की यह मामूली सी दिखने वाली बढ़ोतरी भी पूरे महीने का हिसाब लगाने पर घरेलू बजट को पूरी तरह से हिलाकर रख देती है।
इस बढ़ोतरी का असर केवल सादे दूध तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में दूध से बनने वाली चाय, कॉफी, दही, पनीर, खोवा और मिठाइयों की कीमतों में भी स्वतः ही तेजी देखने को मिलेगी। दुख की बात यह है कि ये नई और बढ़ी हुई दरें राज्य के शहरी इलाकों के साथ-साथ सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के काउंटरों पर भी पूरी तरह से लागू कर दी गई हैं, जिससे समाज का हर तबका समान रूप से प्रभावित हो रहा है। इस मूल्य वृद्धि के बाद अब छत्तीसगढ़ के हर घर की गृहिणियां अपने सीमित मासिक बजट को संतुलित करने के लिए रसोई के अन्य खर्चों में कटौती करने का कड़ा मंथन करने लगी हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प और चिंताजनक होगा कि सरकार इस बढ़ती हुई महंगाई से त्रस्त जनता को राहत देने के लिए आगे क्या कदम उठाती है, लेकिन फिलहाल उपभोक्ताओं के पास (CG Milk Price Hike) की इस कड़वी घूंट को पीने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।




