सीजी भास्कर, 04 जून। छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए जल्द ही आय बढ़ाने (Chhattisgarh Basmati Rice Mission) का नया रास्ता खुल सकता है। राज्य सरकार ने किसानों की आमदनी में वृद्धि और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Basmati Rice Mission की तैयारी शुरू कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती और सुगंधित चावल की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इस संबंध में कृषि मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ. संजय त्रिपाठी, बीज निगम के अधिकारी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में राज्य में बासमती धान उत्पादन की संभावनाओं और किसानों को इससे होने वाले आर्थिक लाभ पर विस्तार से चर्चा की गई।
किसानों की आय बढ़ाने सरकार की नई पहल
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में परंपरागत धान उत्पादन के साथ-साथ फसल विविधीकरण की दिशा में भी काम किया जाना जरूरी है। बासमती धान की खेती किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर प्रदान कर सकती है और राज्य को निर्यात आधारित कृषि अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।
पायलट प्रोजेक्ट से होगी शुरुआत
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि राज्य में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान उत्पादन को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। इसके लिए ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु, मिट्टी और तापमान बासमती धान की खेती के लिए उपयुक्त हों।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ पहले से ही धान उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखता है। यदि चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाया जाता है तो किसानों को सामान्य धान की तुलना में अधिक लाभ मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती और अन्य सुगंधित चावलों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही मांग
बैठक में बताया गया कि यूरोपीय देशों सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय बासमती चावल की मांग तेजी से बढ़ रही है। सुगंधित चावल की गुणवत्ता और निर्यात क्षमता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन और गुणवत्ता मानकों का पालन किया जाए तो प्रदेश के किसान निर्यात बाजार से जुड़कर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
किसानों को मिलेगा बायबैक और मार्केटिंग सपोर्ट
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने बैठक में राज्य सरकार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग और निर्यात सुविधाओं को विकसित करने में भागीदारी की सहमति जताई।
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और छत्तीसगढ़ को सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकेगी।
निर्यात आधारित कृषि को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बासमती धान मिशन सफल होता है तो यह किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य के कृषि निर्यात को भी नई दिशा देगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा।




