सीजी भास्कर, 10 जून। महादेव घाट ओवरब्रिज को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज (bridge project) हो गई है। लंबे समय से इस मार्ग पर जाम से परेशान लोगों को उम्मीद थी कि पुल निर्माण का काम जल्द शुरू होगा, लेकिन अब सामने आई जानकारी ने इंतजार और बढ़ा दिया है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद भी निर्माण कार्य जमीन पर नहीं उतर सका।
रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों और स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतना महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट आगे क्यों नहीं बढ़ पाया। दो साल बीत जाने के बाद अब विभाग को फिर से नई प्रक्रिया शुरू करनी पड़ रही है।
अनुबंध नहीं होने से अटका काम : bridge project
रायपुर और अमलेश्वर के बीच यातायात दबाव कम करने के उद्देश्य से महादेव घाट ओवरब्रिज परियोजना को स्वीकृति दी गई थी। वर्ष 2024 में मंजूरी मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग ने नवंबर 2025 में 18.66 करोड़ रुपये की लागत वाला टेंडर जारी किया था।
तकनीकी और वित्तीय परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिसंबर 2025 में विश्रामपुर की एग्रो स्टील वर्क कंपनी को लगभग पांच प्रतिशत दर पर कार्य आवंटित करते हुए वर्क ऑर्डर जारी किया गया था। हालांकि आदेश मिलने के बावजूद कंपनी ने विभाग के साथ आवश्यक अनुबंध नहीं किया।
चार माह इंतजार के बाद उठाया कदम
विभाग ने कई महीनों तक कंपनी की ओर से प्रक्रिया पूरी किए जाने का इंतजार किया। करीब चार माह बीत जाने के बाद भी प्रतिनिधि अनुबंध के लिए नहीं पहुंचे। इसके बाद विभाग ने सुरक्षा जमा राशि जब्त कर दी और अप्रैल 2026 में दोबारा निविदा जारी करने का फैसला लिया।
नए टेंडर में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया है। तकनीकी परीक्षण पूरा हो चुका है और अब वित्तीय मूल्यांकन की प्रक्रिया (bridge project) चल रही है। विभाग का दावा है कि अगले कुछ दिनों में नई एजेंसी का चयन कर कार्य आवंटन और अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
18 माह में पूरा करना होगा निर्माण
महादेव घाट के पुराने पुल के पास खारुन नदी पर बनने वाला यह स्टील ओवरब्रिज 180 मीटर लंबा और 17 मीटर चौड़ा प्रस्तावित है। निर्माण एजेंसी को कार्य शुरू होने की तारीख से 18 माह के भीतर पूरा प्रोजेक्ट खत्म करना होगा।
यातायात सर्वे के अनुसार शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक इस मार्ग पर सबसे अधिक दबाव रहता है। रायपुर, अमलेश्वर, पाटन और दुर्ग भिलाई के बीच आने जाने वाले हजारों वाहन प्रतिदिन जाम की समस्या से जूझते हैं।
मानसून से बढ़ सकती है चुनौती
विभाग की योजना थी कि गर्मी के मौसम में नदी का जलस्तर कम रहने के दौरान नींव और प्रारंभिक संरचनात्मक कार्य पूरे कर लिए जाएं। लेकिन ठेकेदार के पीछे हटने से पूरी समयसारिणी प्रभावित हो गई।
अब मानसून शुरू होने के कारण नदी और उसके आसपास होने वाले निर्माण कार्यों में बाधा आने की आशंका जताई (bridge project) जा रही है। ऐसे हालात में परियोजना शुरू होने के बाद भी शुरुआती गति सीमित रह सकती है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन
अधिकारियों के मुताबिक अमलेश्वर, पाटन रोड और आसपास के क्षेत्रों में लगातार आबादी बढ़ रही है। इसी को देखते हुए आगामी तीन दशक की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर फोरलेन ओवरब्रिज की रूपरेखा तैयार की गई है।
परियोजना पूरी होने के बाद महादेव घाट, चंगोराभाठा, डीडी नगर, संतोषी नगर, प्रोफेसर कॉलोनी, अमलेश्वर, अंजोरा और पाटन रोड क्षेत्र के लोगों को राहत (bridge project) मिलेगी। साथ ही दुर्ग भिलाई से रायपुर आने जाने वाले यात्रियों और नवा रायपुर से जुड़े मार्गों की आवाजाही भी अधिक सुगम होने की उम्मीद है।



