सीजी भास्कर, 14 जून। बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने बिना पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य के बीमा क्लेम खारिज करने को गलत मानते हुए कंपनी को परिवादी को 28.24 लाख रुपए से अधिक की राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। (Insurance Claim Rejection Ruled Unfair)
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह डेढ़ महीने के भीतर भुगतान करे। आदेश के अनुसार कंपनी को एक्सीवेटर मशीन की क्षति के लिए 27.94 लाख रुपए, मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपए और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए देना होगा। इसके अलावा साल 2022 से भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
आग लगने से क्षतिग्रस्त हुई थी मशीन : Insurance Claim Rejection Ruled Unfair
मामला कोरबा निवासी एके शर्मा से जुड़ा है। उनकी वोल्वो क्राउलर एक्सीवेटर मशीन 7 अगस्त 2021 को एसईसीएल की बिजारी खदान में काम के दौरान आग लगने से क्षतिग्रस्त हो गई थी। मशीन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से ‘कॉन्ट्रैक्ट प्लांट एंड मशीनरी पॉलिसी’ के तहत कराया गया था।
सर्वे रिपोर्ट में शॉर्ट सर्किट को बताया गया कारण
घटना के बाद एके शर्मा ने मशीन की मरम्मत पर 46.41 लाख रुपए खर्च होने का दावा बीमा कंपनी के पास प्रस्तुत किया। जांच के लिए नियुक्त सर्वेयर मैक इंश्योरेंस सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में आग लगने का कारण कंट्रोल पैनल में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट बताया और इसे आकस्मिक दुर्घटना माना।
बीमा कंपनी ने इस आधार पर खारिज किया क्लेम
बीमा कंपनी ने दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मशीन का ऑपरेटर उसे चालू हालत में छोड़कर चला गया था, जो बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। कंपनी ने इसी आधार पर क्लेम देने से इनकार कर दिया।
आयोग ने बीमा कंपनी की दलील को किया खारिज : Insurance Claim Rejection Ruled Unfair
आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि मशीन में ऑटो-कट तकनीक लगी हुई थी। इस तकनीक के तहत चाबी बंद करने के तीन मिनट बाद मशीन अपने आप बंद हो जाती है।
आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति में ऑपरेटर की लापरवाही नहीं मानी जा सकती। साथ ही बीमा कंपनी ऑपरेटर की जानबूझकर की गई लापरवाही साबित करने में भी असफल रही।
सेवा में कमी मानते हुए दिया मुआवजा
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बिना ठोस तकनीकी साक्ष्य के बीमा क्लेम खारिज करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी को परिवादी को 28.24 लाख रुपए से अधिक की क्षतिपूर्ति राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया है।





