सीजी भास्कर, 17 जून : छत्तीसगढ़ के विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती देने वाली बहुप्रतीक्षित चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। लगभग 755 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न केवल कोयला परिवहन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा, बल्कि यात्री सुविधाओं, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन (Champa Korba Third Rail Line) को भारतीय रेलवे के लिए एक रणनीतिक परियोजना माना जा रहा है, जो देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री ने जताया प्रधानमंत्री और रेल मंत्री का आभार
मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने परियोजना की स्वीकृति पर प्रधानमंत्री Narendra Modi और रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। मुख्यमंत्री के अनुसार इस परियोजना से राज्य के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी तथा रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
ऊर्जा राजधानी को मिलेगी बड़ी ताकत
कोरबा को देश की “ऊर्जा राजधानी” के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित ताप विद्युत संयंत्रों और विशाल कोयला खदानों के कारण यह देश के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में शामिल है। चांपा-कोरबा रेल मार्ग साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) की खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क और मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर से जोड़ने वाली अहम कड़ी है। रेल मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में इस मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 10 जोड़ी यात्री ट्रेनें और 55 जोड़ी मालगाड़ियां संचालित होती हैं। आने वाले वर्षों में कोयला उत्पादन में भारी वृद्धि के कारण इस रेल खंड पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।
बढ़ेगी कोयला परिवहन क्षमता
एसईसीएल और एमसीएल की संयुक्त कोयला उत्पादन क्षमता वर्तमान में लगभग 247 मिलियन टन प्रतिवर्ष है, जो भविष्य में बढ़कर लगभग 450 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक पहुंच सकती है। इसके परिणामस्वरूप करीब 200 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला परिवहन की आवश्यकता होगी। ऐसे में चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन (Champa Korba Third Rail Line) परियोजना माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने, ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाने और परिचालन दबाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यात्रियों को भी मिलेगा सीधा लाभ
परियोजना के पूरा होने के बाद प्रतिदिन दोनों दिशाओं में दो अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन की संभावना है। इससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रा सुविधाएं मिलेंगी। रेलवे के अनुमान के अनुसार इस परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 5.95 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। साथ ही करीब 85 करोड़ रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय प्राप्त होने का अनुमान है, जिसमें 82 करोड़ रुपये माल परिवहन और 3 करोड़ रुपये यात्री सेवाओं से आएंगे।
परिचालन लागत में होगी बचत
वर्तमान में इस व्यस्त रेल खंड पर मालगाड़ियों को प्रत्येक दिशा में लगभग पांच मिनट तक रुकना या इंतजार करना पड़ता है। तीसरी लाइन बनने के बाद यह देरी काफी हद तक कम होगी, जिससे रेलवे को प्रतिवर्ष लगभग 1.30 करोड़ रुपये की परिचालन बचत होने का अनुमान है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना नेटवर्क क्षमता विस्तार, माल परिवहन दक्षता में सुधार और ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी।





