सीजी भास्कर, 18 जून : छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के सुदूर, पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और चिकित्सा (Surguja DMF Fund Sanction) के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरगुजा जिले के दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और शिक्षकों की बड़ी समस्या का स्थाई समाधान खोज लिया गया है। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से इसके लिए 5 करोड़ रुपये से अधिक के महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों को हरी झंडी दे दी गई है। इस बजट से ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और शिक्षकों के लिए आधुनिक आवासीय परिसरों (क्वाटर्स) का निर्माण कराया जाएगा, ताकि वे बिना किसी परेशानी के चौबीसों घंटे अपनी सेवाएं दे सकें।
5 प्राथमिक केंद्रों में बनेंगे 25 मेडिकल क्वार्टर
ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों के न रुकने की सबसे बड़ी वजह वहां रहने के लिए सुरक्षित और सर्वसुविधायुक्त मकानों का न होना है। इस कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने एक संयुक्त खाका तैयार किया है।
इन 5 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मिली मंजूरी : सरगुजा जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र दरिमा (अम्बिकापुर), कमलेश्वरपुर (मैनपाट), गुतुरमा (सीतापुर), केदमा (उदयपुर) तथा कुदरी (लखनपुर) को इस योजना में शामिल किया गया है।
बजट और निर्माण एजेंसी : इन 5 प्रमुख केंद्रों में कुल 25 आधुनिक मेडिकल स्टाफ क्वार्टरों के निर्माण के लिए 2 करोड़ 49 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। इन सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करने की कमान ‘ग्रामीण यांत्रिकी सेवा’ (RES) को सौंपी गई है।
बदलेगी स्वास्थ्य की तस्वीर : इन क्वार्टरों के बन जाने से आपातकालीन स्थिति (इमरजेंसी केस) या प्रसव (डिलीवरी) के दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को आधी रात को भी भटकना नहीं पड़ेगा। वे कार्यस्थल (अस्पताल परिसर) के समीप ही उपलब्ध रहेंगे, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
मैनपाट और उदयपुर में बनेंगे 30 ‘ट्रांजिट हॉस्टल’
स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा विभाग के लिए भी सरगुजा के दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों को रोकना एक बड़ी चुनौती रही है। इसके समाधान के लिए जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) ने विशेष रूप से दो बड़े पहाड़ी और आदिवासी बाहुल्य विकासखंडों का चयन किया है।
ट्रांजिट हॉस्टल का निर्माण : विकासखंड मैनपाट के नर्मदापुर तथा उदयपुर विकासखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष रूप से ‘ट्रांजिट हॉस्टल’ (शिक्षक आवास) के रूप में 30 भव्य क्वार्टरों के निर्माण को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है।
बजट और निर्माण एजेंसी : इस बेहद महत्वाकांक्षी आवासीय परियोजना के लिए 2 करोड़ 55 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इन शिक्षक आवासों के उच्च स्तरीय निर्माण की जिम्मेदारी ‘लोक निर्माण विभाग’ (PWD) को आवंटित की गई है।
इस सर्वसुविधायुक्त ट्रांजिट हॉस्टल के बन जाने से जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे गांवों में पदस्थ शिक्षकों को सुरक्षित, सर्वसुविधायुक्त और सम्मानजनक वातावरण में रहने की जगह मिलेगी। इससे न केवल स्कूलों में शिक्षकों की शत-प्रतिशत नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी, बल्कि वे बिना किसी मानसिक तनाव के ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था (Quality Education) दे सकेंगे।
आम जनता तक बेहतर जनसेवाएं पहुंचाना होगा और अधिक सुगम
सरगुजा जिला प्रशासन का मानना है कि इन दोनों बड़ी आवासीय परियोजनाओं के धरातल पर पूर्ण होने के बाद जिले के सबसे पिछड़े और सुदूर वनांचलों में सरकारी सेवाओं का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में जाकर काम करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को जैसे ही आवश्यक आधारभूत सुविधाएं (रोड, पानी, बिजली के साथ सुरक्षित मकान) मिलेंगी, उनका मनोबल बढ़ेगा। इसका सीधा फायदा सरगुजा अंचल के अंतिम छोर पर बैठे उस गरीब आम नागरिक को मिलेगा, जिसे छोटी सी बीमारी के इलाज या अच्छी शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय के बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था।





