सीजी भास्कर, 20 जून : राज्य में लिफ्ट से जुड़े हादसों और तकनीकी खराबी के कारण लोगों के फंसने की बढ़ती घटनाओं (Lift Safety Rules) को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने लिफ्ट सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाया है। अब बहुमंजिला आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक भवनों में संचालित लिफ्टों की सुरक्षा जांच, ऑडिट और निगरानी की जिम्मेदारी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को सौंप दी गई है। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका पालन सभी भवन स्वामियों और संचालन एजेंसियों को अनिवार्य रूप से करना होगा।
सरकार का उद्देश्य लिफ्ट दुर्घटनाओं को रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद लिफ्टों की नियमित जांच होगी तथा सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले भवनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया तो होगी कार्रवाई
नई गाइडलाइन के अनुसार सभी भवन स्वामियों और संचालन एजेंसियों को लिफ्टों का नियमित निरीक्षण, परीक्षण और रखरखाव कराना अनिवार्य होगा। लिफ्ट संचालन को National Building Code (NBC) और Bureau of Indian Standards (BIS) द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाए रखना होगा।
यदि किसी भवन में लिफ्ट सुरक्षा संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है या आवश्यक निरीक्षण नहीं कराया जाता है, तो संबंधित लिफ्ट को तत्काल सील किया जा सकता है। इसके साथ ही जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। किसी दुर्घटना या जनहानि की स्थिति में भवन स्वामी या संचालन एजेंसी को जवाबदेह माना जाएगा।
साप्ताहिक से पांच वर्षीय ऑडिट तक तय हुआ शेड्यूल
सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन में लिफ्टों की जांच और रखरखाव के लिए विस्तृत समय-सारणी तय की गई है।
साप्ताहिक निरीक्षण
- लिफ्ट के दरवाजों की कार्यक्षमता की जांच
- अलार्म सिस्टम की जांच
- आपातकालीन संचार व्यवस्था का परीक्षण
- कंट्रोल पैनल और डिस्प्ले की समीक्षा
मासिक निरीक्षण
- वायर रोप और पुली सिस्टम की जांच
- ब्रेक सिस्टम का परीक्षण
- सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता का सत्यापन
- इलेक्ट्रिकल कनेक्शन और कंट्रोल यूनिट की जांच
त्रैमासिक निरीक्षण
- लोड टेस्ट
- सुरक्षा तंत्र का सत्यापन
- बैकअप सिस्टम की जांच
- आपातकालीन संचालन व्यवस्था का परीक्षण
वार्षिक निरीक्षण
- वैधानिक दस्तावेजों और लाइसेंस की समीक्षा
- संपूर्ण तकनीकी परीक्षण
- सुरक्षा प्रमाणन का सत्यापन
पांच वर्षीय व्यापक परीक्षण
- पूर्ण सुरक्षा ऑडिट
- आवश्यक ओवरहॉल
- महत्वपूर्ण उपकरणों का प्रतिस्थापन
- संरचनात्मक और तकनीकी परीक्षण
यात्रियों के लिए भी जारी किए गए सुरक्षा निर्देश
सरकार ने केवल तकनीकी जांच तक ही सीमित न रहते हुए यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
गाइडलाइन के अनुसार:
- 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अकेले लिफ्ट का उपयोग नहीं करने दिया जाएगा।
- आग लगने की स्थिति में लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का उपयोग करना होगा।
- लिफ्ट में फंसने पर घबराने के बजाय अलार्म या इंटरकॉम का उपयोग करना चाहिए।
- स्वयं लिफ्ट का दरवाजा खोलकर बाहर निकलने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
- निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को लिफ्ट में प्रवेश नहीं करना चाहिए।
नगर निकायों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी। अब स्थानीय निकायों को अपने क्षेत्र के बहुमंजिला भवनों में संचालित लिफ्टों की नियमित निगरानी करनी होगी। साथ ही निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करना होगा।
सरकार का मानना है कि दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना अधिक प्रभावी है। इसी सोच के तहत यह नई व्यवस्था लागू की गई है ताकि भविष्य में लिफ्ट से जुड़े हादसों को रोका जा सके और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।





