सीजी भास्कर, 20 जून : सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने सुकमा जिले में वन्यजीव शिकार के बड़े मामले का पर्दाफाश कर दिया। इंस्टाग्राम पर अपलोड किए गए एक वीडियो के आधार पर वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वीडियो में आरोपी तीन मृत विशाल भारतीय गिलहरियों (Indian Giant Squirrel) और एक बंदर के साथ दिखाई दे रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने जांच शुरू की और वीडियो में नजर आए सभी लोगों की पहचान कर उन्हें हिरासत में ले लिया।
Instagram Reel से खुला शिकार का पूरा खेल
वन विभाग को सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान एक वीडियो मिला, जिसमें कुछ युवक संरक्षित वन्यजीवों के शव के साथ नजर आ रहे थे। जांच में पता चला कि वीडियो कोंटा विकासखंड के ग्राम गोलापल्ली क्षेत्र का है। वीडियो वायरल होते ही वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम सक्रिय हुई और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई।
जांच के दौरान टीम ने गोलापल्ली और आसपास के गांवों में दबिश देकर सात लोगों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने विशाल भारतीय गिलहरियों का शिकार करने और उनका मांस खाने की बात स्वीकार की है।
हथियार, गुलेल और मोबाइल जब्त
कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने आरोपियों के कब्जे से एक देशी निर्मित हथियार, दो गुलेल और घटना से जुड़े मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जांच को मजबूत बनाने के लिए घटनास्थल से मिले बालों के नमूने तथा जब्त मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर मामले को और मजबूत किया जाएगा।
15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
वन विभाग ने सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद सभी सात आरोपियों को 15 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में मड़कम आनंद, सोड़ी बिच्चैया, माड़वी राजू, माड़वी चलपनी, सुकमा सोमैया, उईका इशाक और मल्लम चन्द्रा शामिल हैं। सभी आरोपी गोलापल्ली, माड़ीगुड़ा, लक्ष्मीपुरम और सिंगाराम गांवों के निवासी बताए गए हैं।
संरक्षित प्रजाति है Indian Giant Squirrel
वन विभाग के अनुसार विशाल भारतीय गिलहरी (Ratufa indica) भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में शामिल है और यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित प्रजाति है। इस दुर्लभ वन्यजीव का शिकार करना गंभीर अपराध माना जाता है और दोषियों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। वन अधिकारियों ने कहा कि जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के लिए ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।





