सीजी भास्कर, 22 जून : दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति, चौकस कमान और मैदानी अमले की एकजुटता क्या रंग ला सकती है, इसकी एक बेमिसाल कहानी छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ से सामने आई है। जो जिला अप्रैल महीने तक स्वास्थ्य सेवाओं (Sarangarh Bilaigarh Health Services) के राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) में पूरे राज्य में सबसे निचले पायदानों पर संघर्ष कर रहा था, उसने महज दो महीने के भीतर सफलता की एक ऐसी नई इबारत लिखी है, जिसने पूरे प्रदेश को चौंका दिया है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी नेतृत्व के दम पर जिले ने अपने नेशनल क्वालिटी स्कोर में 39.4 प्रतिशत का एक ऐतिहासिक और अप्रत्याशित सुधार दर्ज किया है। यह कायापलट सिर्फ कागजी आंकड़ों का नहीं है, बल्कि धरातल पर सरकारी अस्पतालों के प्रति आम जनता के टूटते भरोसे को दोबारा मजबूत करने की एक जीती-जागती मिसाल है।
27% से 37.65% का सफर
बीते अप्रैल 2026 तक सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का NQAS स्कोर महज 27 प्रतिशत था, जिसे किसी भी विकासशील जिले के लिए बेहद चिंताजनक माना जाता है। लेकिन इस बड़ी चुनौती को कलेक्टर ने एक मिशन के रूप में लिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के साथ मिलकर स्वास्थ्य ढांचे की कमियों (Gap Analysis) को बारीकी से परखा गया। नतीजा यह हुआ कि जून आते-आते यह स्कोर 10.65 प्रतिशत अंकों की सीधी छलांग लगाकर 37.65 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस कायापलट को राज्य के स्वास्थ्य महकमे में एक बड़ी और अनुकरणीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
जमीन पर क्या बदला, जिसने पलट दी पूरी तस्वीर
अस्पतालों की सूरत को बदलने के लिए विभाग ने सिर्फ बैठकें नहीं कीं, बल्कि ‘क्वालिटी कल्चर’ (गुणवत्ता की संस्कृति) को हर कर्मचारी के रूटीन में शामिल किया। इसके तहत जमीन पर ये बड़े बदलाव किए गए:
साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण: अस्पतालों में इंफेक्शन कंट्रोल पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया। बायोमेडिकल वेस्ट (अस्पताल के कचरे) के वैज्ञानिक प्रबंधन को कड़ाई से लागू किया गया।
मरीज हितैषी सुविधाएं: ओपीडी (OPD) से लेकर वार्डों तक के बुनियादी ढांचे को सुधारा गया, जिससे मरीजों को सुकून देने वाला माहौल मिले।
स्टाफ की ट्रेनिंग: डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और ग्रामीण क्षेत्रों के मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को लगातार तकनीकी प्रशिक्षण देकर उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाया गया।
इस अभियान को गति देने के लिए जिले के तीनों विकासखंडों (बिलाईगढ़, सारंगढ़ और बरमकेला) के खंड चिकित्सा अधिकारियों (BMO) ने कमान संभाली और नियमित मैदानी दौरों व मैराथन समीक्षा बैठकों से यह सुनिश्चित किया कि कहीं भी काम में ढिलाई न हो।
गौरव का क्षण: 14 स्वास्थ्य केंद्रों को मिला ‘राष्ट्रीय प्रमाण पत्र’
इस सामूहिक प्रयास का सबसे बड़ा परिणाम यह रहा कि जिले के दूरदराज के इलाकों में स्थित 14 स्वास्थ्य केंद्रों ने कड़े राष्ट्रीय मानकों को पास करते हुए NQAS क्वालिफाइड होने का गौरव हासिल कर लिया है:
सारंगढ़ विकासखंड: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालपुर, कनकबीरा, गोड़म और भेड़वन के साथ-साथ उप स्वास्थ्य केंद्र बेलाडुला, पचरी और सालर ने राष्ट्रीय मानक सूची में जगह बनाई।
बरमकेला विकासखंड: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेंधरा और उप स्वास्थ्य केंद्र पिहरा, साल्हेओना, नंदीगांव, लुकापारा, सोनबाला व रिसोरा ने भी कड़े पैमानों को पार कर यह तमगा हासिल किया।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ की यह ऐतिहासिक छलांग इस बात का जीवंत प्रमाण है कि संसाधन चाहे जितने भी सीमित हों, अगर नेतृत्व में विजन हो और टीम में समर्पण, तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तस्वीर को बहुत कम समय में बदला जा सकता है।





