सीजी भास्कर, 22 जून। उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर हलचल (Campus Safety) बढ़ गई है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को अब अपने परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से आकलन करना होगा। हाल के निर्देशों के बाद कई संस्थानों ने आंतरिक समीक्षा शुरू कर दी है और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जानकारी जुटाई जा रही है।
बिलासपुर जैसे बड़े शैक्षणिक केंद्र में इस पहल को विशेष महत्व दिया जा रहा है। यहां प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आते जाते हैं। ऐसे में परिसर के भीतर सुरक्षित माहौल बनाए रखने को लेकर प्रशासन और संस्थानों की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है।
उच्च शिक्षण परिसरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में जारी इस प्रक्रिया के तहत उन संस्थानों को 10 जुलाई तक जानकारी भेजनी होगी, जिन्होंने अभी तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी सख्ती Campus Safety
यूजीसी के सचिव प्रो. श्यामा रथ द्वारा जारी रिमाइंडर में कहा गया है कि शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार संस्थानों को अपने परिसरों में आवारा कुत्तों की आवाजाही रोकने तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए किए गए उपायों का विवरण देना अनिवार्य है।
इससे पहले भी दिसंबर 2025 और अप्रैल 2026 में संस्थानों को परामर्श जारी कर रिपोर्ट मांगी गई थी। हालांकि कई शिक्षण संस्थानों ने निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, जिसके बाद दोबारा स्मरण पत्र जारी किया गया है।
बिलासपुर के संस्थान भी दायरे में
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध शासकीय और निजी महाविद्यालयों सहित जिले के लगभग 130 शिक्षण संस्थान इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे। सभी संस्थानों को परिसर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी।
इन बिंदुओं पर देनी होगी जानकारी
संस्थानों को आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए किए गए उपाय, प्रवेश द्वारों की निगरानी, छात्र सुरक्षा तंत्र, शिकायत निवारण व्यवस्था, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की जानकारी देनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा मानकों के पालन का आकलन किया जाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से शिक्षण परिसरों में सुरक्षा को लेकर जवाबदेही (Campus Safety) बढ़ेगी। साथ ही सुरक्षा ऑडिट, निगरानी तंत्र और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूती मिल सकती है।
विश्वविद्यालय ने कहा, समय पर भेजेंगे रिपोर्ट
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अश्वनी दीक्षित ने बताया कि यूजीसी का पत्र प्राप्त हो चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन आवश्यक जानकारी एकत्र कर निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट भेजने की प्रक्रिया पूरी करेगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान याचिका की सुनवाई के दौरान बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की (Campus Safety) गई थी। इसके बाद शिक्षण परिसरों में सुरक्षा उपाय मजबूत करने और आवारा कुत्तों की आवाजाही नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए थे। वर्तमान कार्रवाई उसी प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।





