सीजी भास्कर, 26 जून : कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा क्षेत्र में Paddy Procurement Scam Kabirdham का बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की संयुक्त जांच में तीन धान खरीदी केंद्रों से बड़ी मात्रा में धान और खाली बारदानों के गायब होने का खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट के अनुसार इस गड़बड़ी से शासन को 81.19 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई है। मामले में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
तीन धान खरीदी केंद्रों में मिला बड़ा फर्जीवाड़ा
संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट के मुताबिक विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान बासिनझोरी, बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा धान खरीदी केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में कुल 2,441.92 क्विंटल धान और 21,982 खाली बारदानों की कमी पाई गई। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में तीनों केंद्रों के संचालन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार बासिनझोरी केंद्र से 585.98 क्विंटल धान और 4,130 खाली बारदाने, बिरनपुर कला केंद्र से 1,032.36 क्विंटल धान तथा 5,777 बारदाने, जबकि सहसपुर लोहारा केंद्र से 823.58 क्विंटल धान और 12,075 खाली बारदाने गायब पाए गए।
तौल पत्रकों में भी मिली गंभीर अनियमितता
जांच के दौरान दस्तावेजों की पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई तौल पत्रकों में केवल किसानों के हस्ताक्षर मौजूद थे, जबकि खरीदी प्रभारी, फड़ प्रभारी और तौल कर्मियों के हस्ताक्षर नहीं थे। इससे रिकॉर्ड में हेरफेर और निर्धारित प्रक्रिया के उल्लंघन की आशंका और मजबूत हो गई है। अधिकारियों ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितता माना है।
छह लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने समिति प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी, फड़ प्रभारी बलदाऊ डड़सेना, तुकाराम साहू, कंप्यूटर ऑपरेटर बिहारी राम साहू, पीलूराम साहू और महावीर साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों पर सरकारी संपत्ति में गड़बड़ी, वित्तीय अनियमितता और सरकारी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
धान खरीदी नीति के उल्लंघन की पुष्टि
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने बताया कि सक्षम अधिकारियों के निर्देश और संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस दस्तावेजों, रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है। जांच में यह भी पाया गया कि धान खरीदी नीति 2025-26 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया तथा धान की कमी और अन्य अनियमितताओं की जानकारी समय पर संबंधित अधिकारियों को नहीं दी गई। इससे शासन के दिशा-निर्देशों और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन हुआ है। मामले की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित घोटाले में अन्य लोगों की भूमिका भी रही है या नहीं।



