सीजी भास्कर, 27 जून : छत्तीसगढ़ सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत राज्य में माइक्रो ब्रुअरी खोलने की अनुमति दे दी है। छत्तीसगढ़ की माइक्रो ब्रुअरी नीति (Micro Brewery Policy) लागू होने के बाद अब निर्धारित लाइसेंस लेकर सीमित मात्रा में ताजा क्राफ्ट बीयर का उत्पादन किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से होटल, रेस्तरां और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी। माइक्रो ब्रुअरी में तैयार की गई बीयर केवल उसी परिसर में ग्राहकों को परोसी जाएगी, जहां उसका उत्पादन किया जाएगा।
माइक्रो ब्रुअरी के लिए तय किए गए नियम
छत्तीसगढ़ की माइक्रो ब्रुअरी नीति (Micro Brewery Policy) के तहत माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए कम से कम 4 हजार वर्गफीट क्षेत्र होना अनिवार्य होगा। परिसर में फायर सेफ्टी, मशीनों की सुरक्षा और अन्य निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन करना होगा। लाइसेंस के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये शुल्क देना होगा, जबकि लाइसेंस शुल्क का 25 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षा राशि के रूप में पहले जमा करना अनिवार्य रहेगा। एक माइक्रो ब्रुअरी को प्रतिदिन अधिकतम 1,000 बल्क लीटर तथा वर्षभर में 3.65 लाख बल्क लीटर तक क्राफ्ट बीयर उत्पादन की अनुमति मिलेगी।
क्राफ्ट बीयर कारोबार को मिलेगा नया विस्तार
छत्तीसगढ़ की माइक्रो ब्रुअरी नीति (Micro Brewery Policy) से राज्य में क्राफ्ट बीयर उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है। क्राफ्ट बीयर छोटे बैच में तैयार की जाती है, जिससे इसकी ताजगी, गुणवत्ता और स्वाद बेहतर बनाए रखा जाता है। इसके निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। बाजार में व्हीट, मैंगो, एप्पल और चॉकलेट जैसे विभिन्न फ्लेवर उपलब्ध हो सकते हैं। सरकार ने इस पर 60 रुपये प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क निर्धारित किया है, जबकि एक गिलास क्राफ्ट बीयर की अनुमानित कीमत 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है। इससे निवेश, रोजगार और पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
उत्पादन और बिक्री पर रहेगी सख्त निगरानी
छत्तीसगढ़ की माइक्रो ब्रुअरी नीति (Micro Brewery Policy) के तहत उत्पादन, बिक्री, कर भुगतान और संचालन की नियमित निगरानी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य कारोबार को बढ़ावा देने के साथ-साथ नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के अनुसार निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



