सीजी भास्कर, 27 जून : राजनांदगांव जिले में मानसून की देरी का असर अब जल संसाधनों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। मोंगरा बैराज में (Mongra Barrage Water Crisis) गहराने से अंबागढ़ चौकी के पास स्थित यह प्रमुख जलाशय लगातार दूसरे वर्ष पूरी तरह सूख गया है। जलस्तर डेड स्टोरेज तक पहुंचने से नहरों में पानी की आपूर्ति बंद हो गई है, जिससे सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर संकट गहराने लगा है। प्रशासन और किसानों की उम्मीद अब अच्छी मानसूनी बारिश पर टिकी हुई है।
बैराज पूरी तरह खाली, नहरों में पानी की आपूर्ति बंद
लगातार पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण मोंगरा बैराज का जलस्तर लगातार घटता गया और अब यह पूरी तरह खाली हो चुका है। मोंगरा बैराज में (Mongra Barrage Water Crisis) के चलते बैराज के भीतर दरारें और पहले पानी में डूबे पेड़ों के ठूंठ तक दिखाई देने लगे हैं। अधिकारियों के अनुसार, कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश होने के बाद ही बैराज में दोबारा जलभराव संभव होगा। फिलहाल नहरों में पानी छोड़ने की कोई संभावना नहीं है।
सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर बढ़ा संकट
मोंगरा बैराज से मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की लगभग 3,670 हेक्टेयर तथा राजनांदगांव जिले की करीब 6,651 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है। इसके अलावा राजनांदगांव और दुर्ग शहरों की पेयजल आपूर्ति भी इसी बैराज से होती है। मोंगरा बैराज में (Mongra Barrage Water Crisis) बढ़ने से प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण 15 प्रतिशत से भी कम रह गया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
50 से अधिक गांवों में बढ़ी चिंता
बैराज के सूखने का सीधा असर आसपास के 50 से अधिक गांवों पर पड़ रहा है, जहां दैनिक उपयोग के पानी और सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। 182.05 मीटर लंबे इस बैराज में 10 रेडियल गेट हैं और इसकी कुल जल भंडारण क्षमता 32.05 मिलियन घन मीटर है। मोंगरा बैराज में (Mongra Barrage Water Crisis) के कारण प्रशासन की निगाह अब मानसून की अच्छी बारिश पर टिकी है, ताकि बैराज में दोबारा जलभराव हो सके और प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिल सके।



