सीजी भास्कर, 27 जून। कभी रायपुर की जीवनदायिनी कही जाने वाली खारुन नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। जिस नदी के पानी से कभी लोग प्यास बुझाते थे, उसी नदी का पानी अब न पीने लायक बचा है, न नहाने योग्य। प्राकृतिक बहाव को जगह-जगह बने एनीकेटों ने रोक दिया है। शहर के गंदे नालों और फैक्ट्रियों के रासायनिक अपशिष्ट ने नदी को प्रदूषण की ऐसी चादर में लपेट दिया है कि कई किलोमीटर तक पानी दिखाई ही नहीं देता, सिर्फ जलकुंभी का हरा विस्तार नजर आता है। (Kharun River Pollution Crisis)
नदी का पानी कहीं काला है, कहीं हरा तो कहीं मटमैला। प्लास्टिक कचरा, शराब की खाली बोतलें और घरेलू अपशिष्ट नदी के किनारों पर बिखरे पड़े हैं। विशेषकर रायपुर जिले से गुजरने वाली खारुन की हालत सबसे अधिक चिंताजनक दिखाई देती है।
‘खारुन करुण कथा’ की पिछली दो कड़ियों में तरीघाट से महादेव घाट तक की बदहाली का चित्र सामने रखा गया था। तीसरी कड़ी में महादेव घाट से सोमनाथ तक की पदयात्रा की आँखों देखी कहानी।
महादेव घाट से शुरू हुई बदहाली की तस्वीर : Kharun River Pollution Crisis
महादेव घाट स्थित खारुन पुल के नीचे से हमारी टीम ने यात्रा शुरू की। पहले ही कदम पर नदी की पीड़ा सामने थी। पुल के नीचे प्लास्टिक कचरे का ढेर, जलकुंभी का घना फैलाव और काले पड़ चुके पानी ने साफ संकेत दे दिया कि खारुन अब एक बीमार नदी बन चुकी है।
जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, नदी का बहता पानी कम और जलकुंभी का साम्राज्य अधिक दिखाई देता गया। रायपुरा, सरोना और चंदनडीह तक नदी लगभग पूरी तरह जलकुंभी से ढकी मिली। कई स्थानों पर शहर के गंदे नाले सीधे नदी में गिरते दिखाई दिए।
नदी के दूसरे किनारे, दुर्ग जिले के भोथलीडीह के पास एक बड़ा ईंट-भट्ठा नदी तक फैल चुका है। जिस हिस्से में भट्ठा संचालित हो रहा है, वहाँ नदी के तट का कटाव भी साफ दिखाई देता है।
गंदे पानी में नहाने को मजबूर लोग
सरोना के पंप हाउस के पास बने एनीकेट के नीचे चंदनडीह के ग्रामीण उसी प्रदूषित पानी में नहाते मिले।
ग्रामीण बताते हैं कि 15-16 साल पहले खारुन का पानी साफ रहता था। नदी में पर्याप्त बहाव होता था और लोग उसका पानी पीने तक इस्तेमाल करते थे। आज स्थिति यह है कि पानी न पीने लायक बचा है और न ही स्नान योग्य।
इसके बावजूद लोगों की मजबूरी है कि गाँव में अब भी हर घर तक नल-जल योजना नहीं पहुँची है। जहाँ सार्वजनिक नल लगे हैं, वहाँ भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता।
फार्म हाउसों ने रोक दिया नदी का रास्ता : Kharun River Pollution Crisis
चंदनडीह से आगे अटारी मार्ग पर स्थित एक फिल्टर प्लांट का अपशिष्ट भी खारुन में ही समा जाता है। इसके बाद नदी किनारे का प्राकृतिक रास्ता बड़े-बड़े फार्म हाउसों की घेराबंदी से बंद हो जाता है। नंदनवन तक पहुँचने के लिए हमारी टीम को नदी छोड़कर दूसरे रास्ते से जाना पड़ा।



