सीजी भास्कर, 11 अगस्त। बलरामपुर, रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में मंगलवार सुबह वन विभाग के कर्मचारी पर जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। वन वाटिका रामानुजगंज में अवैध रूप से लकड़ी काटने से रोकने पर फॉरेस्ट गार्ड के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि लकड़ी काटने से मना करने पर आरोपी ने डंडे से हमला कर दिया। घटना में फॉरेस्ट गार्ड पिंटू मालाकार के सिर में गंभीर चोट लगी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। घायल को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। (Balrampur Forest Guard Attack)
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लकड़ी काटने को लेकर सवाल किए जाने पर विवाद : Balrampur Forest Guard Attack
जानकारी के मुताबिक, मनोज भुईया अपनी पत्नी के साथ करीब 4 से 5 फीट लंबा लकड़ी का लट्ठा कंधे पर लेकर वन वाटिका के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान फॉरेस्ट गार्ड पिंटू मालाकार ने उन्हें रोक लिया और लकड़ी के बारे में पूछताछ की। लकड़ी काटने को लेकर सवाल किए जाने पर दोनों के बीच विवाद हो गया।
इसी दौरान आरोप है कि मनोज भुईया ने अपने कंधे पर रखा लकड़ी का लट्ठा फॉरेस्ट गार्ड पर दे मारा। हमले में पिंटू मालाकार जमीन पर गिर गए। उनके सिर में गंभीर चोट आई और कान से खून निकलने लगा।
घटना के समय वहां मौजूद मॉर्निंग वॉक कर रहे लोगों ने बीच-बचाव किया। इसके बाद घायल फॉरेस्ट गार्ड को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजगंज ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया।

सीटी स्कैन की सुविधा नहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजगंज में सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। सिर में गंभीर चोट और कान से खून आने के कारण जांच के लिए सीटी स्कैन की जरूरत महसूस हुई, लेकिन स्थानीय स्तर पर सुविधा नहीं होने के चलते फॉरेस्ट गार्ड को दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामानुजगंज के स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की घोषणाएं पहले भी की जा चुकी हैं, लेकिन कई जरूरी सुविधाएं अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं। इसके चलते गंभीर मरीजों को इलाज और जरूरी जांच के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।
इस घटना के बाद एक बार फिर रामानुजगंज की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जरूरी जांच की सुविधाएं उपलब्ध हों, तो गंभीर मरीजों को तत्काल स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिल सकता है।
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