सीजी भास्कर, 09 जून : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल में जंगली सुअर (Wild Boar Hunting Case) के शिकार से जुड़े मामले ने अब नया विवाद खड़ा कर दिया है। वन्यजीव शिकार प्रकरण में कार्रवाई के बीच रिश्वत लेकर आरोपियों को बचाने के गंभीर आरोप सामने आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर डिप्टी रेंजर का एक वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार पसान वन परिक्षेत्र के लैंगा बीट अंतर्गत करी गांव में कुछ ग्रामीणों द्वारा जंगली सुअर का शिकार किए जाने की सूचना वन विभाग को मिली थी। सूचना के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत कुछ आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। साथ ही शिकार में उपयोग की गई सामग्री भी जब्त की गई थी।
वायरल वीडियो में रिश्वतखोरी के आरोप
इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो (Wild Boar Hunting Case) ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। वायरल वीडियो में डिप्टी रेंजर उषा सोनवानी ग्रामीणों के बीच बैठकर बातचीत करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कथित तौर पर यह कहते हुए सुनाई दे रही हैं कि जंगली सुअर शिकार मामले में कार्रवाई से बचने के लिए आरोपियों ने एक फॉरेस्ट गार्ड को डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक की रकम दी थी।
वीडियो में यह भी सुनाई देता है कि शिकार मामले के बाद उन्हें ग्रामीणों की नाराजगी और आलोचना का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई। वहीं बातचीत के दौरान कुछ ग्रामीण भी कथित रूप से पैसे के लेन-देन का जिक्र करते दिखाई देते हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
वन विभाग ने शुरू की जांच
वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। कटघोरा वनमंडल के डीएफओ कुमार निशांत ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी पसान रेंजर मनीष सिंह को सौंपी गई है।
डीएफओ ने कहा है कि वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी कर्मचारी की संलिप्तता या रिश्वतखोरी के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वन्यजीव संरक्षण पर उठे सवाल
जंगली सुअर के शिकार का मामला पहले से ही संवेदनशील माना जा रहा था। अब रिश्वत और कार्रवाई प्रभावित होने के आरोप सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों की निगाहें अब विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। फिलहाल विभाग वायरल वीडियो की जांच कर रहा है और अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



