सीजी भास्कर, 09 जून। रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडलों में पिछले 24 दिनों के भीतर चार हाथी शावकों की मौत के मामलों में जांच रिपोर्ट से महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। विशेषज्ञों की जांच में दो शावकों की मौत का कारण गंभीर संक्रमण पाया गया है। एक शावक की मौत हेपेटाइटिस (यकृत संक्रमण) जबकि दूसरे की मृत्यु सेप्टीसीमिया (रक्त संक्रमण) के कारण हुई। इससे पहले एक अन्य शावक की मौत निमोनिया से होने की पुष्टि हो चुकी है। (Death of elephant calves in Raigarh revealed)
लगातार मौतों से बढ़ी वन विभाग की चिंता : Death of elephant calves in Raigarh revealed
8 मई से 1 जून के बीच एक ही हाथी दल के चार शावकों की मौत ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी थी। विभिन्न स्थानों पर शावकों के शव मिलने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पोस्टमॉर्टम कराया और नमूनों को जांच के लिए देहरादून तथा बरेली की प्रयोगशालाओं में भेजा था। जांच रिपोर्ट आने के बाद मौतों के कारण स्पष्ट हो सके हैं।
हाल के दिनों में तालाबों और जल स्रोतों के आसपास शावकों के शव मिलने की घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस और सेप्टीसीमिया जैसी बीमारियां हाथी शावकों के लिए घातक साबित हो सकती हैं।
विशेष कार्यशाला में विशेषज्ञों ने दी जानकारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाथियों की मौत के कारणों और उनके बचाव के उपायों पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यशाला में हाथियों में होने वाली बीमारियों, संक्रमण की पहचान, उपचार, निगरानी और संरक्षण के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी गई। वन अधिकारियों और कर्मचारियों को हाथियों की स्वास्थ्य जांच तथा देखभाल के आधुनिक तरीकों से भी अवगत कराया गया।
शावकों की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत : Death of elephant calves in Raigarh revealed
रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडलों के जंगलों में वर्तमान में 137 हाथी मौजूद हैं। इनमें 37 नर, 62 मादा और 35 शावक शामिल हैं। लगातार हुई मौतों के बाद वन विभाग ने हाथी शावकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है।
वन विभाग के अनुसार ट्रैकर्स, हाथी मित्र दल और वनकर्मियों की टीमें हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। इसके अलावा ड्रोन, ट्रैप कैमरों और थर्मल ड्रोन की सहायता से भी निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी असामान्य स्थिति का समय रहते पता लगाया जा सके।
वन अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है और हाथियों के स्वास्थ्य संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।



