सीजी भास्कर, 30 जून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संस्थापक डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) किसी भी नागरिक की स्वतंत्रता या धार्मिक अधिकारों को समाप्त करने वाला कानून नहीं है, बल्कि देश के सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान धर्म, जाति या पंथ के आधार पर नहीं, बल्कि भारतीय नागरिक के रूप में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लेकर समाज में जो आशंकाएं और भ्रम फैले हैं, वे काफी हद तक राजनीतिक कारणों से पैदा हुए हैं। जबकि इसका मूल उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि संवाद बढ़ने के साथ यूसीसी को लेकर लोगों की गलतफहमियां धीरे-धीरे दूर हो रही हैं।
सभी धर्मों के सम्मान के साथ समान कानून की वकालत
डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है, जहां विभिन्न धर्मों, भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं। ऐसे में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) किसी धर्म विशेष के अधिकारों को सीमित नहीं करती, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी आधार तैयार करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में सभी नागरिक समान हों, यही लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना भी है।
धर्मांतरण के मामलों पर जताई चिंता
छत्तीसगढ़ में सामने आ रहे धर्मांतरण के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि लालच, दबाव या धोखे के माध्यम से कराया गया धर्मांतरण लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था चुनने और उसका पालन करने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन किसी भी प्रकार का जबरन या प्रलोभन देकर कराया गया धर्म परिवर्तन स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के प्रति सम्मान और सामाजिक सद्भाव देश की सबसे बड़ी आवश्यकता है। समाज में आपसी विश्वास और सौहार्द बना रहेगा, तभी राष्ट्र मजबूत होगा।
वोट बैंक की राजनीति पर भी साधा निशाना
आजादी के बाद की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि लंबे समय तक “फूट डालो और राज करो” की सोच का प्रभाव भारतीय राजनीति में दिखाई देता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राजनीतिक दलों ने विकास और राष्ट्रीय हित के बजाय वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता दी। हालांकि उनका कहना था कि अब परिस्थितियां बदल रही हैं और सभी समुदायों को समान अवसरों के साथ देश के विकास में भागीदारी का वातावरण मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य सामाजिक समरसता, समान अधिकार और राष्ट्रीय एकता में निहित है। सभी नागरिक यदि समान अवसरों और समान अधिकारों के साथ आगे बढ़ेंगे, तो देश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।



