सीजी भास्कर, 05 जुलाई : पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी (Pandwani) की महान साधिका डॉ. तीजन बाई (Teejan Bai) के निधन के साथ छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। बिलासपुर से उनका रिश्ता केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह शहर उनके सम्मान, स्नेह और लोककला के प्रति समर्पण का साक्षी रहा। जब-जब तीजन बाई ने बिलासपुर की धरती पर महाभारत की कथा को अपनी सशक्त आवाज़ में जीवंत किया, तब-तब श्रोताओं ने भारतीय लोक परंपरा की अद्भुत अनुभूति की।
बिलासपुर से रहा आत्मीय रिश्ता
बिलासपुर, तीजन बाई (Teejan Bai) की सांस्कृतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। 19 जुलाई 2016 को तत्कालीन बिलासपुर विश्वविद्यालय (वर्तमान अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय) ने उन्हें मानद डी.लिट. की उपाधि से सम्मानित किया था। यह सम्मान केवल एक लोक कलाकार का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा और पंडवानी (Pandwani) की गौरवशाली विरासत का सम्मान माना गया।
इसके बाद भी वे समय-समय पर बिलासपुर में आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होती रहीं। उनकी अंतिम प्रमुख उपस्थिति 4 जुलाई 2025 को आयोजित युवा महोत्सव-2025 में मुख्य अतिथि के रूप में रही। इसके अलावा वे स्पीक मैके सहित कई सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी प्रस्तुति और मार्गदर्शन से नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहीं।
लोक कला जगत में शोक की लहर
तीजन बाई (Teejan Bai) के निधन का समाचार मिलते ही बिलासपुर के साहित्यकारों, लोक कलाकारों, रंगकर्मियों और कला प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने कहा कि उन्होंने पंडवानी (Pandwani) को केवल मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाकर भारतीय लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखा।
पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय ने दी श्रद्धांजलि
पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय ने कहा कि तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की लोक-सांस्कृतिक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति शैली, सशक्त आवाज़ और प्रभावशाली अभिनय से पंडवानी (Pandwani) को विश्व पटल पर स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि तीजन बाई आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेंगी। लोककला जगत में उनके जाने से जो रिक्तता आई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार तथा असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति दें।



