सीजी भास्कर, 2 अगस्त : बिलासपुर रेल मंडल में जनरल टिकट (General Ticket) लेने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन ट्रेनों में उपलब्ध सीटें उनकी तुलना में काफी कम हैं। ऑफ सीजन के बावजूद प्रतिदिन 56 हजार से अधिक जनरल टिकट बिक रहे हैं, जबकि जनरल कोचों की कुल क्षमता करीब 40 हजार यात्रियों की ही है। ऐसे में हर दिन लगभग 16 हजार यात्रियों को बिना सीट के खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है।
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स्टेशन पर जनरल कोचों में भारी भीड़
बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के पहुंचते ही जनरल कोचों में चढ़ने के लिए यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ जाती है। हालात ऐसे हैं कि यात्रियों को बैठना तो दूर, खड़े होने तक की जगह मुश्किल से मिलती है। सावन के दौरान बाबाधाम जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से आने वाले दिनों में जनरल कोचों पर दबाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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जनरल कोच कम, एसी और स्लीपर ज्यादा
बिलासपुर मंडल से प्रतिदिन 82 एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें कुल 398 जनरल कोच हैं, जिनकी क्षमता करीब 39,800 यात्रियों की है। वहीं बिलासपुर से चलने वाली 14 एक्सप्रेस ट्रेनों में 58 जनरल कोच हैं, जिनमें लगभग 5,800 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। इसके अलावा दो पैसेंजर और पांच मेमू ट्रेनों में करीब 6,500 सीटें उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कुल क्षमता यात्रियों की मांग से काफी कम है।
कई ट्रेनों में घटाए गए जनरल डिब्बे
रेलवे ने पिछले कुछ वर्षों में कई ट्रेनों में जनरल कोचों की संख्या कम कर एसी और स्लीपर कोच बढ़ाए हैं। इसका सीधा असर सामान्य यात्रियों पर पड़ा है। बिलासपुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस में पहले छह जनरल कोच थे, जिन्हें घटाकर चार कर दिया गया है। इसी तरह कई अन्य ट्रेनों में भी जनरल डिब्बों की संख्या कम की गई है।
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प्रीमियम ट्रेनों में नहीं हैं जनरल कोच
बिलासपुर मंडल की अधिकांश प्रीमियम ट्रेनों जैसे वंदे भारत, राजधानी, दुरंतो, हमसफर और गरीब रथ में जनरल कोच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं अंबिकापुर-मदनमहल एक्सप्रेस में सबसे अधिक 10 जनरल कोच, कोरबा-हसदेव एक्सप्रेस में 7, चिरमिरी-रीवा एक्सप्रेस में 6 और दुर्ग-अंबिकापुर एक्सप्रेस में 5 जनरल कोच लगाए गए हैं।
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रेलवे ने बताई तकनीकी वजह
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि एलएचबी रैक में 22 से अधिक कोच नहीं लगाए जा सकते, क्योंकि अधिकांश स्टेशनों के प्लेटफॉर्म की लंबाई सीमित है। सामान्य व्यवस्था के तहत अधिकांश ट्रेनों में आगे और पीछे दो-दो जनरल कोच ही लगाए जाते हैं।



