सीजी भास्कर, 16 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर शुरू हुए राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन लोगों को लेकर स्पष्टीकरण दिया, जिन्हें प्रधानमंत्री के बयान के संदर्भ में ‘दिमागी नक्सल’ कहा गया था। (Kiren Rijiju on Dimaagi Naxal)
रिजिजू के मुताबिक, इसमें वे लोग शामिल हैं जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते। उन्होंने अलगाववादियों का समर्थन करने और जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 का समर्थन करने वालों का भी जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने उन लोगों को भी इस श्रेणी में बताया जो पूर्वोत्तर भारत को देश से अलग करने की कोशिशों का समर्थन करते हैं।
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पीएम मोदी के बयान पर शुरू हुआ विवाद : Kiren Rijiju on Dimaagi Naxal
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से दिए भाषण में कहा था कि देश से हथियारबंद नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता मिली है, लेकिन नक्सली विचारधारा रखने वाले लोग अब भी मौजूद हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत बताई थी।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना की और ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया।
रिजिजू ने बताई ‘दिमागी नक्सल’ की परिभाषा
रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का निशाना विपक्षी नेता नहीं थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का बयान उन लोगों को लेकर था जो माओवादी विचारधारा का समर्थन करते हैं, संविधान को अस्वीकार करते हैं या देश की एकता और अखंडता के खिलाफ अलगाववादी गतिविधियों का समर्थन करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के बयान को राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ टिप्पणी (Kiren Rijiju on Dimaagi Naxal) के तौर पर पेश किया जा रहा है, जबकि भाषण का संदर्भ देश की सुरक्षा और राष्ट्र की एकता से जुड़ा था। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
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