सीजी भास्कर, 2 जुलाई। छत्तीसगढ़ की राजनीति में बुधवार को उस समय हलचल मच गई, जब भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत (Ravi Bhagat Resignation) ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मंडल अध्यक्ष को भेजा इस्तीफा, निजी कारणों का किया उल्लेख
रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र से जुड़े भाजपा नेता रवि भगत (Ravi Bhagat Resignation) ने भाजपा मंडल अध्यक्ष रमेश होता को अपना इस्तीफा सौंपा है। इस्तीफा पत्र में उन्होंने केवल निजी कारणों का उल्लेख करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने की बात कही है।
पार्टी के प्रति जताया आभार
अपने इस्तीफा पत्र में रवि भगत (Ravi Bhagat Resignation) ने लिखा कि एक छोटे से गांव के कार्यकर्ता होने के बावजूद भाजपा ने उन्हें पहचान, सम्मान और जिम्मेदारियां दीं, जिसके लिए वे पार्टी के प्रति आभारी हैं। हालांकि निजी कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने संगठन से अलग होने का निर्णय लिया है।
उन्होंने अपने इस्तीफे की प्रतिलिपि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को भी भेजी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ इस्तीफा
रवि भगत (Ravi Bhagat Resignation) का इस्तीफा सामने आने के बाद इसकी प्रति सोशल मीडिया पर तेजी से साझा की जा रही है। मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका।
2025 में मिला था कारण बताओ नोटिस
यह पहला अवसर नहीं है जब रवि भगत (Ravi Bhagat Resignation) संगठनात्मक कारणों से चर्चा में आए हों। जुलाई 2025 में भाजपा प्रदेश कार्यालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में सोशल मीडिया पर पार्टी की रीति-नीति और संगठनात्मक अनुशासन के विपरीत टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था।
प्रदेश महामंत्री एवं मुख्यालय प्रभारी जगदीश (रामू) रोहरा ने तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था और चेतावनी दी थी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
DMF फंड को लेकर लगातार उठाते रहे सवाल
पिछले कुछ समय से रवि भगत (Ravi Bhagat Resignation) जिला खनिज न्यास (DMF) फंड के उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर डीएमएफ फंड में कथित अनियमितताओं और खर्च के तरीकों को लेकर कई बार अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
उनके इन बयानों को लेकर संगठन के भीतर भी चर्चा होती रही थी। अब इस्तीफे के बाद डीएमएफ फंड से जुड़े उनके पुराने बयान और संगठन के साथ मतभेद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं।
प्रदेश की राजनीति में बढ़ी चर्चाएं
रवि भगत (Ravi Bhagat Resignation) के इस्तीफे के बाद भाजपा के भीतर संभावित राजनीतिक कारणों और आगे की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि उन्होंने अपने पत्र में केवल निजी कारणों का उल्लेख किया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को पिछले संगठनात्मक विवादों और DMF फंड पर उठाए गए सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है।



