सीजी भास्कर, 9 अगस्त : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को विश्वगुरु बनाने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश को वास्तव में विश्वगुरु (RSS Mohan Bhagwat) बनाना है तो समाज के वंचित और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से मिलकर इस दिशा में काम करने की अपील की।
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पारधी समुदाय के कार्यक्रम में पहुंचे मोहन भागवत
मोहन भागवत महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के खामगांव में पारधी समुदाय के आवासीय विद्यालय पहुंचे थे। यहां उन्होंने तीन खेल मैदानों का उद्घाटन किया और सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भटके और विमुक्त समुदाय के लोगों को समाज का अभिन्न हिस्सा बताते हुए उनके जीवन में सुधार के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई।
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पारधी समुदाय के इतिहास का किया जिक्र
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि भटके और विमुक्त समुदाय का हर व्यक्ति अपना है। उनके मुताबिक, कभी ये समुदाय ज्ञान बांटने का काम करते थे और निस्वार्थ भाव से लोगों तक अपना ज्ञान पहुंचाते थे, लेकिन समय के साथ वे समाज के हाशिए पर चले गए।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण पूरे पारधी समुदाय को अपराधी जनजाति घोषित कर दिया गया था। इसके कारण यह समुदाय विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गया। उन्होंने कहा कि यदि भारत को विश्वगुरु (RSS Mohan Bhagwat) बनाना है तो ऐसे वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाना होगा।
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सभी समाज को एक साथ आने की जरूरत
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत को आगे बढ़ाने के लिए समाज के सभी वर्गों को एक साथ आना होगा। उनका कहना था कि हर व्यक्ति और परिवार को शिक्षा तथा जीवन की बुनियादी जरूरतें उपलब्ध होनी चाहिए। इसके लिए केवल सरकार पर निर्भर रहने के बजाय समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
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गुलामी के कारण समाज में आया बिखराव
मोहन भागवत ने भारतीय समाज के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणों और लंबे समय तक रही गुलामी के कारण समाज में बिखराव पैदा हुआ। इसके परिणामस्वरूप वंचित वर्गों की संख्या बढ़ती गई। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इन समुदायों ने कभी अधीनता स्वीकार नहीं की और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे।
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पारधी समुदाय के विकास पर संघ का जोर
भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय से पारधी समुदाय के विकास के लिए काम कर रहा है। कार्यक्रम में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे भी मौजूद रहे। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों को शिक्षा, अवसर और सम्मान के साथ मुख्यधारा में जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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