रिपोर्टर – ऐश कुमार
सीजी भास्कर, 30 मई : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे ग्रामीण अंचलों में जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए चल रही किसानों की ऐतिहासिक जंग अब पूरी तरह से आक्रामक और राजनीतिक रूप अख्तियार कर चुकी है। तिल्दा नेवरा के ग्राम अलदा में प्रस्तावित स्पंज आयरन उद्योग के खिलाफ पिछले डेढ़ वर्षों से सीना ताने खड़े अन्नदाताओं के समर्थन में रविवार को सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद मैदान में उतर गए।
अलदा में आयोजित विशाल किसान महासम्मेलन में जब हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों, महिलाओं और युवाओं की हुंकार गूंजी, तो पूरा इलाका ‘माटी की रक्षा’ के नारों से थर्रा उठा। इस बेहद संवेदनशील और आक्रामक आंदोलन (CG Farmers Protest Baghel) ने उद्योगपतियों और स्थानीय प्रशासन के गठजोड़ के उस बड़े सस्पेंस से पर्दा उठा दिया है, जिसके तहत ग्रामीणों की मर्जी के बिना उनके भविष्य को दांव पर लगाने का खेल खेला जा रहा था।
दरअसल, यह पूरा विवाद केवल एक फैक्टरी का नहीं है, बल्कि यह कहानी है एक पूरे इलाके के अस्तित्व को बचाने की। ग्रामीणों का सीधा और गंभीर आरोप है कि गांव की पीठ पीछे, बिना किसी वास्तविक बैठक के, सरपंच, सचिव और कुछ बिकाऊ पंचों ने बंद कमरों में एक फर्जी ग्रामसभा की स्क्रिप्ट लिखी और उद्योग स्थापना के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया। जब इस भारी-भरकम हेरफेर (CG Farmers Protest Baghel) की भनक ग्रामीणों को लगी, तब से लेकर आज तक डेढ़ साल से यहां विद्रोह की मशाल जल रही है।
तीन-तीन अफसरों की जांच में फर्जीवाड़ा साबित
महासम्मेलन के मंच से गरजते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पूरे कांड का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सस्पेंस खोला। उन्होंने सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर तीन अलग-अलग जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ मुहर लगा दी है कि अलदा की वह ग्रामसभा पूरी तरह फर्जी और अवैध थी। इसके बावजूद आज तक न तो उस जालसाज सरपंच-सचिव पर कोई एफआईआर हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी को सस्पेंड किया गया। शासन के इस लचर ढर्रे (CG Farmers Protest Baghel) के कारण अब ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
भूपेश बघेल ने दोटूक शब्दों में मांग की कि जब ग्रामसभा ही फर्जी थी, तो पर्यावरण विभाग ने किस अंधे कानून के तहत इस स्पंज आयरन उद्योग को ग्रीन सिग्नल दे दिया? इस अमानवीय विफलता के खिलाफ कांग्रेस पार्टी अब कोर्ट से लेकर सड़क तक एक कड़ा नियम (CG Farmers Protest Baghel) लागू करवाने के लिए आक्रामक आंदोलन करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फर्जी एनओसी के आधार पर किसी भी उद्योगपति ने गांव की पवित्र जमीन पर एक ईंट भी रखने की कोशिश की, तो उसे किसानों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
निर्दोष किसानों को अपराधी बनाने पर भड़के नेता
इस पूरे आंदोलन का सबसे मार्मिक और मानवीय पहलू समोदा बांध से जुड़ा कुम्हारी जलाशय है। भूपेश बघेल ने याद दिलाया कि यह जलाशय कोई साधारण तालाब नहीं है, बल्कि आसपास के लगभग 20 से 25 गांवों के हजारों किसानों, मवेशियों और बेजुबान पक्षियों की जिंदगी का इकलौता सहारा है। इसी पानी से खेतों में धान लहलहाता है। उन्होंने साफ कहा कि किसानों के हक का पानी छीनकर प्रदूषण फैलाने वाले स्पंज आयरन उद्योग को देने का कोई भी हिडन एजेंडा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय पुलिस और प्रशासन की बर्बरता पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए आंदोलन की गति (CG Farmers Protest Baghel) को दबाने का कुत्सित प्रयास किया गया। क्षेत्र के स्वाभिमानी किसान रामखिलावन वर्मा और दुर्गेश वर्मा जैसे निर्दोष लोगों के खिलाफ न केवल फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए, बल्कि उन्हें डराने के लिए थाने में आदतन अपराधियों की तरह उनकी तस्वीरें टांग दी गईं। हालांकि, महासम्मेलन के खौफ के कारण ऐन वक्त पर पुलिस को वे तस्वीरें हटानी पड़ीं, जो यह साबित करता है कि पूरी कार्रवाई गलत नीयत से की गई थी।
इस महासम्मेलन में भाटापारा विधायक इंद्र साव, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी, पूर्व विधायक जनकराम वर्मा और धरसींवा की पूर्व विधायक अनीता शर्मा सहित हजारों ग्रामीणों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि जब तक यह फर्जी एनओसी निरस्त नहीं होती, तब तक अलदा की धरती पर यह सत्याग्रह अनवरत जारी रहेगा।




