सीजी भास्कर, 19 अगस्त। रायपुर में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के जरिए सरकारी नौकरी में लाभ लेने के आरोपों ने शासन की चिंता (Disability Certificate) बढ़ा दी है। अब ऐसे संदिग्ध मामलों की दोबारा जांच कराने की तैयारी शुरू हो गई है। समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अधिकारियों के साथ बैठक कर जांच प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में तय किया गया कि संदिग्ध Disability Certificate मामलों की जांच राज्य या संभाग स्तर पर गठित विशेष मेडिकल बोर्ड के जरिए कराई जाएगी। संबंधित लोगों को बोर्ड के सामने उपस्थित होकर दोबारा मेडिकल परीक्षण कराना होगा। जांच पूरी होने के बाद मेडिकल रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।

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मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ डॉक्टर रहेंगे मौजूद
संदिग्ध मामलों की जांच के दौरान मेडिकल बोर्ड में आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी विशेष जांच के लिए जरूरत पड़ने पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं लेने पर भी विचार किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रमाण-पत्र की वास्तविकता की दोबारा जांच करना और गलत तरीके से दिव्यांगता का लाभ लेने वाले मामलों की पहचान करना है।
वास्तविक दिव्यांगजनों को नहीं होगी परेशानी
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि वास्तविक दिव्यांगजनों को प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड बनवाने में अनावश्यक परेशानी न हो। इसके लिए प्रक्रिया को सरल बनाने पर चर्चा हुई।
दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष मेडिकल बोर्ड तथा जांच शिविर आयोजित करने की योजना पर भी जोर दिया गया। इससे जरूरतमंद लोगों को प्रमाण-पत्र के लिए दूर-दराज के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी चर्चा
बैठक में दिव्यांगजनों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने से जुड़े मुद्दों पर भी विचार किया गया। जरूरतमंद लोगों को समय पर उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा प्रदेश में संचालित नशामुक्ति केंद्रों को मजबूत करने और उनकी व्यवस्थाओं में सुधार से जुड़े विषयों पर भी अधिकारियों के साथ चर्चा हुई।
सरकार की कोशिश है कि फर्जी प्रमाण-पत्र के मामलों में निष्पक्ष जांच हो, वहीं वास्तविक दिव्यांगजनों को उनके अधिकार और सरकारी सुविधाएं आसानी से मिल सकें।
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