सीजी भास्कर, 22 अगस्त : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने वाले ASI (FIR Filing ASI) को ही जांच अधिकारी बनाए जाने के मामले में बिलासपुर पुलिस से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सवाल उठाया कि जिस अधिकारी ने मामले में एफआईआर दर्ज की, उसी को जांच की जिम्मेदारी कैसे सौंप दी गई। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) से व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है।
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महिला के घर से 2925 नशीली गोलियां जब्त करने का दावा
मामला बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र के बंधवापारा का है। पुलिस ने एक महिला के घर पर दबिश देकर 2925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) टैबलेट बरामद करने का दावा किया था। पुलिस ने इन गोलियों को प्रतिबंधित और नशीला पदार्थ बताते हुए महिला के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और उसे जेल भेज दिया। महिला करीब सात महीने से जेल में है।
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परिवार ने पुलिस पर लगाया फंसाने का आरोप
महिला के भाई ने आरोप लगाया है कि उसकी बहन को सरकंडा पुलिस और उसके बहनोई ने कथित साजिश के तहत मामले में फंसाया। उसने ASI शैलेंद्र सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, जिस पॉलीथिन बैग में कथित प्रतिबंधित दवाएं मिलीं, वह महिला के पास से सीधे बरामद नहीं हुआ था। परिवार का दावा है कि करीब 14 वर्षीय बच्चे को पतंग उड़ाते समय यह बैग घर की छत पर मिला था। बच्चे ने मोबाइल से दवाओं के बारे में जानकारी जुटाई और अपनी मां को बताया। परिवार के अनुसार, बैग को अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास रख दिया गया था।
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नाबालिग को करीब 10 घंटे थाने में रखने का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि बच्चे के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। इसके बावजूद पुलिस उसे थाने ले गई और करीब 10 घंटे तक वहां रखा गया। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि जांच की जाए कि दवाओं से भरा बैग छत तक कैसे पहुंचा और उसे वहां किसने रखा। साथ ही दवाओं के स्रोत और महिला की गिरफ्तारी की परिस्थितियों की भी जांच की मांग की गई है। बच्चे का मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध कराने की बात भी याचिका में कही गई है।
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एफआईआर लिखने वाले अधिकारी को जांच सौंपने पर सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज की और उसी के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई, तो फिर उसी अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी कैसे दी गई। कोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि इसी अधिकारी ने जांच पूरी करने के बाद महिला के खिलाफ चार्जशीट पेश की।
हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने वाले ASI (FIR Filing ASI) शैलेंद्र सिंह के पिछले आचरण और रिकॉर्ड की जानकारी भी पेश करने का निर्देश DGP को दिया है। कोर्ट ने जांच प्रक्रिया को लेकर पुलिस विभाग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
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DGP से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगा
हाईकोर्ट ने DGP को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर पूरे मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि एफआईआर दर्ज करने वाले अधिकारी को ही जांच अधिकारी बनाए जाने के पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी। DGP के शपथपत्र और जांच अधिकारी से जुड़ी जानकारी के आधार पर कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।
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