सीजी भास्कर, 25 अगस्त : छत्तीसगढ़ भाजपा में 25 और 26 अगस्त को बड़ा सियासी मंथन (BJP Strategy) चल रहा है। रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित दो दिवसीय बैठक में प्रदेश के पांचों संभागों से प्रमुख पदाधिकारियों और नेताओं को बुलाकर जमीनी फीडबैक लिया जा रहा है। बैठक में संगठन की स्थिति, सरकार के कामकाज और कार्यकर्ताओं की नाराजगी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
2028 की तैयारी या असंतोष पर लगाम
यह बैठक केवल संगठन की सामान्य समीक्षा तक सीमित नहीं मानी जा रही है। भाजपा के सामने 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू करने के साथ सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की चुनौती भी है। संगठन स्तर पर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि सरकार की योजनाओं का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है और कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी को लेकर क्या माहौल है।
विधानसभा चुनाव में अभी करीब दो साल का समय है, लेकिन भाजपा किसी भी तरह की सत्ता विरोधी भावना को मजबूत होने का मौका नहीं देना चाहती। इसी वजह से बूथ, शक्ति केंद्र और विधानसभा स्तर तक संगठन की स्थिति का फीडबैक जुटाया जा रहा है।
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सरगुजा से शुरू हुआ फीडबैक का दौर
बैठक के पहले चरण में सरगुजा संभाग को विशेष महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इसी क्षेत्र से आते हैं। संगठन स्तर पर संभाग के नेताओं और पदाधिकारियों से सीधे बातचीत कर क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, सरकार के कामकाज और संगठन की सक्रियता की जानकारी ली जा रही है।
संगठन प्रभारी अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय के नेतृत्व में चल रही इस कवायद में जिलों के प्रमुख नेताओं से भी फीडबैक लिया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को भाजपा की चुनावी रणनीति (BJP Strategy) का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
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कार्यकर्ताओं की नाराजगी पर भी नजर
सत्ता में आने के बाद कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच अपेक्षाएं पूरी नहीं होने की शिकायतें सामने आना किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनौती होती है। भाजपा की बैठक में ऐसे मुद्दों पर भी सीधे फीडबैक लिया जा रहा है।
अधिकारियों की कार्यशैली, स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने और मंत्रियों तक कार्यकर्ताओं की पहुंच जैसे विषयों पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। संगठन का जोर सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर है।
जिला से प्रदेश तक संगठन की समीक्षा
प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय के जिलों में किए गए दौरों के बाद अब रायपुर में उस फीडबैक की समीक्षा की जा रही है। किस जिले में संगठन कितना सक्रिय है, पदाधिकारी निचले स्तर के कार्यकर्ताओं से कितना संपर्क रखते हैं और मंडल व शक्ति केंद्रों में नियमित गतिविधियां कितनी प्रभावी हैं, इन सभी पहलुओं पर चर्चा हो रही है।
निष्क्रिय पदाधिकारियों और संगठन में बेहतर प्रदर्शन नहीं करने वाले चेहरों की भी समीक्षा की जा सकती है। वहीं सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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मंत्रियों के कामकाज पर भी रिपोर्ट
बैठक में जिलों के प्रभारी मंत्रियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनके प्रभार वाले जिलों में संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय, प्रशासनिक कामकाज और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर फीडबैक लिया जा रहा है।
माना जा रहा है कि बैठक से सामने आने वाली रिपोर्ट का इस्तेमाल संगठन में बदलाव के साथ भविष्य में मंत्रिमंडल से जुड़े फैसलों में भी किया जा सकता है। हालांकि इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
शाम 6:30 बजे बैठक में शामिल होंगे सीएम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 25 अगस्त की शाम 6:30 बजे बैठक में शामिल होंगे। उनके साथ प्रदेश के बड़े पदाधिकारियों की बैठक होने की संभावना है। इस दौरान संगठन की ओर से जुटाए गए फीडबैक और सरकार के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी इस बैठक को और महत्वपूर्ण बना रही है। सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के साथ 2028 की तैयारी को लेकर भाजपा की रणनीति (BJP Strategy) का अगला खाका भी इसी तरह की बैठकों से तैयार होने की संभावना है।
2028 से पहले संगठन को कसने की तैयारी
रायपुर में चल रही दो दिवसीय बैठक से साफ संकेत मिल रहा है कि भाजपा चुनाव से काफी पहले संगठन की कमियों को दूर करने पर जोर दे रही है। जमीनी फीडबैक, कार्यकर्ताओं की नाराजगी, मंत्रियों के कामकाज और संगठन की सक्रियता की समीक्षा के जरिए पार्टी अपनी तैयारियों को मजबूत करना चाहती है। अब देखना होगा कि बैठक से सामने आने वाले फीडबैक के आधार पर संगठन में कितने बदलाव होते हैं और सरकार के स्तर पर किन मुद्दों पर सुधार की कार्रवाई होती है।




