सीजी भास्कर, 29 अगस्त : पेड़-पौधों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण (Nature Rakhi Festival) का संदेश देने के लिए प्रकृति राखी तिहार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं और बेटियों ने पेड़ों को राखी बांधी और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया। पारंपरिक राखी पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर आयोजित कार्यक्रम में लोगों में खासा उत्साह नजर आया।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने पेड़ों को परिवार के सदस्य की तरह मानते हुए उनकी पूजा-अर्चना की और रक्षा सूत्र बांधा। उन्होंने अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ मौजूदा पेड़ों को बचाने का संदेश दिया। प्रकृति संरक्षण (Nature Rakhi Festival) को लेकर महिलाओं और बेटियों ने कहा कि जिस तरह राखी भाई-बहन के बीच सुरक्षा और प्रेम का प्रतीक है, उसी तरह पेड़ों को राखी बांधना धरती और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाता है।
किसान स्कूल में प्रकृति राखी तिहार का आयोजन
जांजगीर-चाम्पा के बहेराडीह स्थित वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं, बेटियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
प्रतिभागियों ने कहा कि पेड़ हमें शुद्ध हवा, फल, फूल, छाया और जीवन के लिए जरूरी संसाधन देते हैं। इसलिए आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम (Nature Rakhi Festival) के जरिए लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने का संदेश दिया गया।
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पूरे साल प्रकृति संरक्षण के लिए जागरूकता पर जोर
किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने कहा कि प्रकृति राखी तिहार का उद्देश्य केवल एक दिन पेड़ों को राखी बांधना नहीं है। इसका मकसद पूरे वर्ष प्रकृति संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन गांव-गांव में होने चाहिए, ताकि महिलाएं, बेटियां और युवा पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ें। कार्यक्रम में पौधरोपण के साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का भी संकल्प लिया गया।
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अधिकारी, समाजसेवी और महिलाएं हुईं शामिल
कार्यक्रम में जांजगीर की नायब तहसीलदार वर्षा अग्रवाल, माउंटेनर अमिता श्रीवास, समाजसेविका मंजूषा पाटले, चांपा की 12वीं की टॉपर छात्रा खुशबू देवांगन, पूर्व सरपंच चंद्रकला सरवन कश्यप, सक्रिय महिला ललिता यादव, पशु सखी पुष्पा यादव, मितानिन लक्ष्मीन यादव सहित अन्य लोग शामिल हुए।
आरसेटी से अरुण पाण्डेय, अजय अग्रवाल, मणिकांत अग्रवाल तथा बिहान से जुड़ी कृषि सखी, पशु सखी और अन्य कैडर भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। प्रकृति राखी तिहार (Nature Rakhi Festival) में सामाजिक सहभागिता के साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देखने को मिला।
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