सीजी भास्कर, 09 सितंबर : सरकारी स्कूलों में बदलाव के लिए बड़े बजट से ज्यादा जरूरत नई सोच और समर्पण की होती है। धमतरी के शिक्षकों की पहल शिक्षक नवाचार (Dhamtari Teacher Innovation) इसका उदाहरण बनी है, जहां अपने स्तर पर संसाधन जुटाने, नई शिक्षण पद्धतियां अपनाने और जनभागीदारी से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने का प्रयास किया गया। इन प्रयासों से बच्चों की संख्या बढ़ने के साथ उन्हें आधुनिक शिक्षा और बेहतर अवसर भी मिल रहे हैं।

खेल-खेल में पढ़ाई का असर Dhamtari Teacher Innovation
धमतरी जिले के शासकीय प्राथमिक शाला धौराभाठा के शिक्षक लीलाराम साहू ने बच्चों के लिए पढ़ाई को रोचक बनाने पर जोर दिया। खेल-खेल में शिक्षा और टीएलएम आधारित शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों की सीखने में रुचि बढ़ी और स्कूल में छात्र संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाले 23 विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय और एकलव्य विद्यालय के लिए हो चुका है।
उनके कार्यों को ‘पढ़ई तुहर दुआर’ और टीएलएम आधारित शिक्षण के क्षेत्र में राज्य स्तर पर भी पहचान मिली है। शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान के लिए उनका चयन राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है। यह शिक्षक नवाचार (Dhamtari Teacher Innovation) सरकारी स्कूलों में बच्चों की रुचि बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।
यह भी पढ़ें…Korba Clean Air Survey : कभी प्रदूषण के लिए बदनाम कोरबा अब टॉप-10 में
‘मैं हूं गुल्लक’ से डिजिटल शिक्षा
शासकीय माध्यमिक शाला लुगे की शिक्षिका रंजीता साहू ने अपने स्कूल को डिजिटल बनाने का संकल्प लिया। संसाधनों की कमी को बाधा मानने के बजाय उन्होंने ‘मैं हूं गुल्लक’ अभियान शुरू किया। शिक्षकों और पालकों की सहभागिता से जिले के 150 विद्यालयों में स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने की पहल की गई।
इसके अलावा करीब 300 विद्यालयों में गणित वर्णमाला पहुंचाने और लगभग 11 हजार बच्चों को पेन, कॉपी और किताबें उपलब्ध कराने में भी उनकी भूमिका रही। तकनीक और जनभागीदारी के इस प्रयास को देखते हुए उनका चयन भी राज्यपाल पुरस्कार के लिए किया गया है। डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में यह शिक्षक नवाचार (Dhamtari Teacher Innovation) दूसरे स्कूलों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
दृष्टिबाधित बच्चों के लिए पहल
शासकीय प्राथमिक शाला कोलियारी की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य ने समावेशी शिक्षा की दिशा में उल्लेखनीय काम किया। राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका के. शारदा के नेतृत्व में राज्य के 30 शिक्षकों की टीम के साथ मिलकर उन्होंने दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल और ऑडियो आधारित शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में योगदान दिया।
कक्षा 5वीं से 12वीं तक के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार की गईं। यह सामग्री 400 से अधिक स्कूलों और 20 दृष्टिबाधित विशेष विद्यालयों तक पहुंचाई गई है। इस कार्य का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है। समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में यह शिक्षक नवाचार (Dhamtari Teacher Innovation) खास उपलब्धि मानी जा रही है।
यह भी पढ़ें…IGKV A Grade : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को मिली बड़ी उपलब्धि, ICAR ने दिया ‘A ग्रेड
कलेक्टर ने किया सम्मान
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में लीलाराम साहू और रंजीता साहू को शाल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने दोनों शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई दी। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा सहित जिला अधिकारी मौजूद रहे।
कलेक्टर ने कहा कि सरकारी विद्यालयों को बच्चों और पालकों की पहली पसंद बनाने के लिए संसाधनों के साथ-साथ दृष्टिकोण, समर्पण और नवाचार भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि धमतरी के इन शिक्षकों की उपलब्धियां जिले के लिए गर्व का विषय हैं और अन्य शिक्षकों को भी नई पहल के लिए प्रेरित करेंगी।
एक पहल, कई सपने
धमतरी के इन शिक्षकों की उपलब्धियां केवल सम्मान तक सीमित नहीं हैं। सरकारी स्कूलों में बदलाव की इन पहलों ने बच्चों को बेहतर अवसर देने के साथ शिक्षा के नए मॉडल की संभावनाएं भी सामने रखी हैं। कहीं 23 बच्चे नवोदय और एकलव्य विद्यालय तक पहुंचे, तो कहीं डिजिटल संसाधनों से सैकड़ों स्कूल जुड़े और दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए हजारों ऑडियो बुक्स तैयार हुईं।
इन प्रयासों ने साबित किया है कि शिक्षक की पहल और समुदाय की भागीदारी मिलकर शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। यही शिक्षक नवाचार (Dhamtari Teacher Innovation) सरकारी शिक्षा को मजबूत करने और बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने की मिसाल बन रहा है।


