सीजी भास्कर, 11 सितंबर : जर्जर और जोखिमपूर्ण भवनों को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा निर्देश दिया है। अब हादसा होने का इंतजार करने के बजाय संभावित खतरे वाले भवनों की पहले ही पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट (Chhattisgarh Building Safety Audit) कराने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
मुख्यमंत्री ने रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन की जिम्मेदारी केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित खतरे को पहले पहचानकर उसे दूर करना भी जरूरी है।
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हॉस्टल से स्कूल तक जांच
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण कराने को कहा। जहां सुरक्षा संबंधी कमियां मिलें, वहां समय-सीमा तय कर सुधार कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर और एसपी को अपने-अपने जिलों में इस पूरी व्यवस्था की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। सरकार का जोर केवल कागजी निरीक्षण के बजाय जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था (Chhattisgarh Building Safety Audit) सुनिश्चित करने पर है।
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जर्जर भवनों की होगी पहचान
मुख्यमंत्री ने स्कूलों, पुस्तकालयों, छात्रावासों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद पुराने तथा जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए। ऐसे भवन जिनसे जनहानि की आशंका है, उनकी पहचान कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान हो और दुर्घटना की आशंका को पहले ही खत्म किया जा सके। खासकर बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों के पालन में किसी भी तरह की शिथिलता नहीं होनी चाहिए।
लापरवाही पर अफसर जिम्मेदार
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि शासन के निर्देशों के पालन में लापरवाही या उदासीनता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
उन्होंने कलेक्टरों और एसपी को निर्देश दिया कि बैठक में दिए गए निर्देशों पर तत्काल अमल शुरू किया जाए। साथ ही जिलों में किए जा रहे निरीक्षण और सुधारात्मक कार्रवाई की नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए। इस तरह अधिकारियों की जवाबदेही (Chhattisgarh Building Safety Audit) सीधे सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ी गई है।
अवैध शराब पर भी एक्शन
बैठक में मुख्यमंत्री ने अवैध और मिलावटी शराब के खिलाफ भी प्रदेशभर में सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। आबकारी विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय से विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।
जिन इलाकों में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री या मिलावट की आशंका हो, वहां संयुक्त टीमों से छापेमारी कराने के निर्देश दिए गए। अवैध शराब के निर्माण या मिलावट में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई करने को कहा गया है।
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सीमाओं पर बढ़ेगी निगरानी
मुख्यमंत्री ने दूसरे राज्यों से छत्तीसगढ़ में आने वाली अवैध शराब पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सीमावर्ती इलाकों और प्रमुख परिवहन मार्गों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। पुलिस और आबकारी विभाग को सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान कर संयुक्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
सरकार का फोकस अवैध शराब की आपूर्ति, परिवहन और भंडारण की पूरी श्रृंखला पर कार्रवाई करने का है। इसके लिए जिला प्रशासन को भी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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