सीजी भास्कर, 9 अक्टूबर : बस्तर में जल संरक्षण (Bastar Water Conservation) और मिट्टी के कटाव को रोकने की दिशा में कुरमंडी नाले पर बनाई गई गेबियन संरचना उपयोगी साबित हो रही है। बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाई गई इस संरचना से आसपास की कृषि भूमि के संरक्षण और वर्षा जल के ठहराव में मदद मिल रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत इस निर्माण पर 1 लाख 42 हजार 800 रुपये खर्च किए गए।

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3 महीने से ज्यादा समय में पूरा हुआ निर्माण
बास्तानार जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सिलकझोड़ी में कुरमंडी नाला पार्ट-4 पर गेबियन संरचना का निर्माण 4 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। यह काम 20 मई 2026 को पूरा किया गया। जल एवं मृदा संरक्षण (Bastar Water Conservation) के उद्देश्य से किए गए इस कार्य में पत्थरों और लोहे के तारों की जाली का उपयोग किया गया। दुर्गम क्षेत्र में निर्माण सामग्री पहुंचाना और नाले के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए मजबूत संरचना तैयार करना चुनौतीपूर्ण था। ग्राम पंचायत, तकनीकी अमले, ग्राम रोजगार सहायक और स्थानीय ग्रामीणों के समन्वय से निर्माण कार्य पूरा किया गया।
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उपजाऊ मिट्टी बहने की समस्या होगी कम
कुरमंडी नाले में बारिश के दौरान पानी का बहाव तेज होने से आसपास की भूमि का कटाव होता था। इससे उपजाऊ मिट्टी बहने और कृषि भूमि की उर्वरता प्रभावित होने की समस्या सामने आती थी। वर्षा जल का पर्याप्त ठहराव नहीं होने से जल संरक्षण की संभावनाएं भी सीमित थीं। गेबियन संरचना बनने से पानी की गति नियंत्रित करने में मदद मिली है। इससे मिट्टी के कटाव में कमी और वर्षा जल के ठहराव की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। कुरमंडी नाला संरक्षण (Bastar Water Conservation) की यह पहल आसपास की कृषि भूमि को सुरक्षित रखने और भूजल पुनर्भरण की संभावनाओं को बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है।
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गांव में ही ग्रामीणों को मिला रोजगार
इस निर्माण कार्य में स्थानीय श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। इससे ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मिला और उनकी आजीविका को सहारा मिला। मनरेगा के तहत कराए गए इस कार्य से ग्रामीण रोजगार (Bastar Water Conservation) और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को एक साथ बढ़ावा मिला। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पहले बारिश के दौरान नाले का तेज बहाव उपजाऊ मिट्टी को बहा ले जाता था। संरचना बनने के बाद पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। ग्रामीणों ने इसे खेती और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से उपयोगी पहल बताया है।
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जल संरक्षण के लिए उपयोगी पहल
गेबियन संरचना पत्थरों को लोहे की जाली में भरकर बनाई जाती है। इसका इस्तेमाल पानी के बहाव की गति कम करने और मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। कुरमंडी नाले पर इसका निर्माण बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने का उदाहरण है। जल संरक्षण मॉडल (Bastar Water Conservation) के रूप में यह पहल ग्रामीण विकास के साथ खेती और पर्यावरण की जरूरतों को जोड़ती है।



