सीजी भास्कर, 19 अक्टूबर। भिलाई इस्पात संयंत्र के निजीकरण की खबरों को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी (BSP Privatization) तेज हो गई है। BSP प्रबंधन ने इन खबरों को झूठा और भ्रामक बताया है। वहीं, कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

भूपेश बघेल के बयान से शुरू हुआ विवाद BSP Privatization
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 14 अक्टूबर को दावा किया था कि अडानी समूह के प्रतिनिधि BSP का दौरा करने आ रहे हैं। उन्होंने संयंत्र को छत्तीसगढ़ की पहचान बताते हुए निजीकरण का विरोध किया था। विधायक देवेंद्र यादव ने भी प्लांट को बचाने के लिए संघर्ष की बात कही थी।
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भाजपा विधायक ने मांगे दस्तावेज
भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं से निजीकरण से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की चुनौती (BSP Privatization) दी थी। इसके बाद BSP प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि संयंत्र को बेचने संबंधी खबरें भ्रामक हैं। प्रबंधन के अनुसार, इस्पात मंत्रालय और PIB फैक्ट चेक टीम भी इन दावों का खंडन कर चुके हैं।
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गैस सप्लाई को लेकर हुआ है समझौता
BSP और अडानी टोटल गैस लिमिटेड के बीच पाइप के जरिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर समझौता हुआ है। इसका उद्देश्य संयंत्र और टाउनशिप में गैस उपलब्ध कराना बताया गया है।
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विवाद पर पलटवार करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि रिकेश सेन को नेताओं के घरों के बजाय प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने प्रदर्शन (BSP Privatization ) करना चाहिए।
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