सीजी भास्कर, 31 अक्टूबर। दीपावली से पहले बस्तर संभाग के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों को सड़क संपर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। संभाग की 485 बसाहटों के लिए सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं, 280 अन्य बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए 804.06 करोड़ रुपये की लागत के 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव केंद्र सरकार को मिले हैं। नक्सलवाद से मुक्त हुए गांवों तक विकास पहुंचाने के राज्य सरकार के प्रयासों को केंद्र से सकारात्मक प्रतिसाद मिला है। इस पहल से बस्तर में सड़क संपर्क (Bastar Road Connectivity) के विस्तार की उम्मीद बढ़ी है।

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सलवाद से मुक्त हुए गांवों की जरूरतों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर विशेष पहल का आग्रह किया था। केंद्रीय मंत्री चौहान ने अपने जवाब में सड़क और पुल निर्माण के प्रस्तावों, स्वीकृत कार्यों तथा विशेष छूट के अनुरोध पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार जताया है।
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1,168 बसाहटों के सड़क कार्य अलग-अलग चरणों में
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पत्र के अनुसार, बस्तर संभाग की 1,168 बसाहटों से संबंधित सड़क कार्य विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 485 बसाहटों के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई)-4 के पहले बैच में 234 बसाहटों के सड़क कार्यों को मंजूरी मिली है। इनमें बस्तर जिले की 87, बीजापुर की 44, दंतेवाड़ा की 12, कांकेर की 41, कोंडागांव की 34 और सुकमा की 16 बसाहटें शामिल हैं।
दूसरे बैच के तहत 280 बसाहटों को जोड़ने के लिए 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव मिले हैं। इनकी कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर और अनुमानित लागत 804.06 करोड़ रुपये है। इसके अलावा लगभग 474 अन्य चिन्हांकित बसाहटों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए जा रहे हैं।
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सातों जिलों में सड़क संपर्क विस्तार की तैयारी
पीएमजीएसवाई-4 के दूसरे बैच में बस्तर जिले की 114, बीजापुर की 125, दंतेवाड़ा की 63, कांकेर की 140, कोंडागांव की 31, नारायणपुर की 136 और सुकमा की 146 बसाहटों को सड़क संपर्क देने के प्रस्ताव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ग्रामीण सड़क सर्वे ऐप के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है। प्रस्तावित सड़कों को गति शक्ति योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी की जा रही है। सड़क निर्माण से अंदरूनी वनांचल क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा। ग्रामीणों को स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, बाजारों और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। कृषि उपज के परिवहन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
373 पुलों के प्रस्तावों पर विचार
सड़क संपर्क के साथ पुल निर्माण की योजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री के पत्र के अनुसार, पीएमजीएसवाई-4 के पहले बैच के अंतर्गत 206 पुलों और पीएम-जनमन योजना के तहत 167 पुलों के प्रस्तावों पर विचार के लिए अधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई है। इन प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति दिए जाने की बात कही गई है। बस्तर संभाग के लिए 55 लंबे पुलों के प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं। नारायणपुर जैसे दुर्गम जिले में पीएम-जनमन के तहत 22 लंबे पुलों के प्रस्ताव हैं। इनकी अनुमानित लागत करीब 87.45 करोड़ रुपये है। पुल बनने से बारिश के दौरान नदी-नालों के कारण दूसरे क्षेत्रों से कट जाने वाले गांवों को राहत मिलेगी।
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नक्सलमुक्त गांवों के लिए नियमों में छूट की मांग
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने केंद्र सरकार से बस्तर की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सड़क योजना के पात्रता मापदंडों में छूट देने का आग्रह किया है। बस्तर के घने जंगलों और दूर-दूर तक फैली छोटी बसाहटों में कई गांव ऐसे हैं, जिनकी आबादी 100 से भी कम है। पीएमजीएसवाई के मौजूदा जनसंख्या संबंधी मापदंडों के कारण ये गांव बारहमासी सड़क संपर्क की पात्रता से बाहर रह जाते हैं।
शर्मा ने निर्धारित क्लस्टर की जनसंख्या गणना में छूट देने और 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित छोटी बसाहटों को एक क्लस्टर मानकर सड़क स्वीकृति देने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि नक्सलवाद से मुक्त हुए गांवों तक विकास पहुंचाने के लिए इन क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था जरूरी है। केंद्रीय मंत्री चौहान ने बताया कि शेष पात्र बसाहटों की पहचान और सड़क संपर्क की जरूरतों का आकलन करने के लिए ग्राम सड़क सर्वेक्षण (जीएसएस) ऐप के माध्यम से चार महीने का सर्वे शुरू किया गया है। क्लस्टर आधारित व्यवस्था और विशेष छूट के अनुरोध पर परीक्षण के बाद उपलब्ध तथ्यों तथा लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सड़कें बनेंगी विकास का आधार
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद का प्रभाव कम होने के साथ विकास की नई संभावनाएं तेजी से आकार ले रही हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि जिन गांवों में वर्षों तक भय और असुरक्षा का माहौल रहा, वहां सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, संचार और रोजगार की सुविधाएं पहुंचें।
उन्होंने कहा कि सड़क केवल दो स्थानों को जोड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि दूरस्थ गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार है। पक्की सड़क बनने से बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को समय पर उपचार दिलाने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी। सड़क संपर्क (Bastar Road Connectivity) मजबूत होने से शासन की योजनाओं का लाभ भी अंतिम छोर पर रहने वाले परिवारों तक पहुंचाना आसान होगा।

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केंद्र के सहयोग से विकास को मिलेगी गति
विजय शर्मा ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार जताते हुए कहा कि बस्तर में सड़क और पुल निर्माण के प्रस्तावों पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सर्वेक्षण और आगे की कार्रवाई की जानकारी मिलना महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर के शेष पात्र गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से बारहमासी सड़क संपर्क से जोड़ा जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि नक्सलवाद से मुक्त होने वाले प्रत्येक गांव तक विकास की सुविधाएं पहुंचें और बस्तर देश का सबसे विकसित जनजातीय संभाग बने।
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