सीजी भास्कर, रायपुर 01 नवंबर। छत्तीसगढ़ में फायर ऑडिट व्यवस्था (Chhattisgarh Fire Audit Rules) में बड़े बदलाव की तैयारी है। निजी एजेंसियों की मनमानी फीस वसूली और जांच में लापरवाही की शिकायतों के बाद विभाग ने नई व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत भवनों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। कम जोखिम वाली इमारतों को नियमित फायर ऑडिट से छूट मिल सकती है, जबकि हाई रिस्क भवनों की जांच विभाग खुद करेगा। निजी एजेंसियों के शुल्क की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की जाएगी। नगर सेना, नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विभाग के महानिदेशक ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। इसे मंजूरी के लिए शासन के पास भेजा जाएगा।
तीन श्रेणियों में बंटेंगे भवन
प्रस्तावित व्यवस्था (Chhattisgarh Fire Audit Rules) के तहत भवनों को कम, मध्यम और हाई रिस्क यानी उच्च जोखिम वाली श्रेणियों में रखा जाएगा।
- कम जोखिम: ऐसी इमारतों को नियमित फायर ऑडिट से छूट मिल सकती है। इनमें किस ऊंचाई तक के भवन शामिल होंगे, इस पर विचार किया जा रहा है। भवन प्रबंधकों को शपथपत्र देना होगा कि आग से बचाव के जरूरी सुरक्षा सिस्टम लगाए गए हैं।
- मध्यम जोखिम: इन इमारतों का फायर ऑडिट कराया जाएगा, लेकिन कुछ नियमों में छूट देने की तैयारी है।
- हाई रिस्क: बहुमंजिला इमारतों, रासायनिक गतिविधियों वाली फैक्ट्रियों और बड़े बिजली संयंत्रों वाले भवनों को इस श्रेणी में रखा जाएगा। इनका ऑडिट विभाग के इंस्पेक्टर और अधिकृत टीम करेगी।
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निजी एजेंसियों की फीस तय
फिलहाल प्रदेश में फायर ऑडिट के लिए चार निजी एजेंसियां अधिकृत हैं और चारों रायपुर में स्थित हैं। दूसरे जिलों के भवनों का ऑडिट कराने के लिए भी इन्हीं एजेंसियों की टीम भेजनी पड़ती है। इससे जांच में देरी होती है। इसके अलावा अलग-अलग भवनों से एक जैसी जांच के लिए अलग-अलग शुल्क वसूलने और खामियां मिलने के बावजूद एनओसी जारी करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। नई व्यवस्था (Chhattisgarh Fire Audit Rules) में भवन के आकार और जोखिम श्रेणी के अनुसार फीस का स्लैब तय किया जाएगा। निजी एजेंसियां निर्धारित अधिकतम शुल्क से ज्यादा राशि नहीं ले सकेंगी। इससे मनमानी वसूली पर रोक लगाने की कोशिश होगी।
जिलों में बढ़ेंगी एजेंसियां
दूसरे जिलों में फायर ऑडिट में होने वाली देरी दूर करने के लिए विभाग ने अधिकृत एजेंसियों की संख्या बढ़ाने के लिए टेंडर जारी किया है। योजना के तहत राज्य के लगभग हर जिले में कम से कम एक एजेंसी को अधिकृत करने की तैयारी है। इससे स्थानीय स्तर पर ही भवनों का ऑडिट हो सकेगा और रायपुर की चार एजेंसियों पर निर्भरता कम होगी। भवन संचालकों को फायर एनओसी के लिए भी ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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भिलाई हादसे के बाद सवाल
अक्टूबर 2026 में दुर्ग जिले के भिलाई स्थित हथखोज औद्योगिक क्षेत्र की एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण विस्फोट के बाद आग लग गई थी। हादसे के बाद फैक्ट्री संचालकों ने बीमा क्लेम किया तो पता चला कि फैक्ट्री का फायर ऑडिट पूरा नहीं हुआ था। इस कारण बीमा क्लेम मिलने में अड़चन आई।
फैक्ट्री संचालकों के मुताबिक, उन्होंने हादसे से कई दिन पहले फायर ऑडिट के लिए आवेदन किया था और थर्ड पार्टी एजेंसी को फीस भी जमा कर दी थी। इसके बावजूद एजेंसी ने न तो एनओसी जारी की और न ही ऑडिट से जुड़ी कागजी प्रक्रिया पूरी की। इस मामले की शिकायत विभाग के मुख्यालय तक पहुंच चुकी है।
मंजूरी के बाद लागू होगी व्यवस्था
भिलाई की घटना और निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच विभाग नई व्यवस्था लाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव को शासन की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जा सकेगा। विभाग का मानना है कि इससे फायर ऑडिट में पारदर्शिता आएगी और भवनों की सुरक्षा जांच अधिक प्रभावी हो सकेगी।
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