सीजी भास्कर, भिलाई नगर, 1 नवंबर। बच्चों को बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन देना अभिभावकों के लिए भारी पड़ सकता है। दुर्ग की सत्र अदालत (Durg Court Bike Accident Case) ने सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। लापरवाही से बाइक चलाकर जान लेने वाले युवक को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। वहीं, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बेटे को बाइक देने वाले पिता को भी 3 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है। न्यायाधीश के. विनोद कुजूर की अदालत ने दोनों को जेल भेजने का आदेश दिया।
कोहका में हुआ था हादसा
मामला पिछले वर्ष 4 अगस्त की रात का है। भिलाई के कोहका स्थित इंदु आईटी स्कूल के पास बिना वैध लाइसेंस के बाइक चला रहे युवक ने तेज रफ्तार और लापरवाही से सामने से आ रही एक्टिवा को टक्कर मार दी थी। हादसे में एक्टिवा सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था, बाद में उसकी मौत हो गई।
बेटे के साथ पिता को सजा
मामले की सुनवाई के बाद दुर्ग की सत्र अदालत ने बाइक चला रहे आरोपी युवक को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं, बेटे को वाहन चलाने के लिए बाइक देने वाले पिता को 3 महीने के साधारण कारावास से दंडित किया गया। इस फैसले (Durg Court Bike Accident Case) के जरिए अदालत ने वाहन मालिकों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया है।
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अभिभावकों के लिए चेतावनी
मोटर यान अधिनियम के तहत बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाले व्यक्ति या नाबालिग को वाहन चलाने के लिए देना वाहन मालिक के लिए भी कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में वाहन स्वामी के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई और जेल का प्रावधान है। अदालत का यह फैसला उन अभिभावकों के लिए चेतावनी है, जो नियमों की अनदेखी कर अपने बच्चों को बाइक या अन्य वाहन सौंप देते हैं। वाहन चलाने की अनुमति देने से पहले उम्र और वैध ड्राइविंग लाइसेंस की जांच करना जरूरी है।



