सीजी भास्कर, 26 अगस्त । छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य की बदहाल सड़कों और उनसे हो रहे लगातार हादसों को लेकर सोमवार को कड़ा रुख अपनाया।
अदालत ने साफ चेतावनी दी कि रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे और बिलासपुर शहर की टूटी-फूटी सड़कों की मरम्मत अब हर हाल में होनी चाहिए।
कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को तुरंत कार्रवाई करने और अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
यह सख्ती (High Court Strict on Bad Roads in Chhattisgarh) राज्य में लंबे समय से उपेक्षित सड़क सुधार कार्यों पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।
(High Court Strict on Bad Roads in Chhattisgarh : सड़कों की दुर्दशा पर हाई कोर्ट सख्त, कहा- हर हाल में करें मरम्मत, लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी)
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पेंड्रीडीह से नेहरू चौक तक की सड़क की दुर्दशा पर गंभीर टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि इस मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे और दरारें हैं, जिससे हर दिन हादसों का खतरा बना हुआ है। इस पर नाराजगी जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने PWD को आदेश दिया कि सभी गड्ढों और क्रैक्स को तत्काल दुरुस्त किया जाए।
अदालत ने यह भी साफ किया कि इस मामले की निरंतर निगरानी (High Court Strict on Bad Roads in Chhattisgarh) होगी और अगली सुनवाई 4 सितंबर को होगी।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट पहले भी स्वतः संज्ञान लेकर सड़कों और आवारा मवेशियों के कारण हो रहे हादसों पर चिंता जता चुका है।
अदालत ने सरकार से पूछा था कि आखिर ऐसा क्यों है कि काम केवल कोर्ट के कहने पर ही शुरू होते हैं। अदालत की यह टिप्पणी सीधे तौर पर राज्य की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है और यह संदेश देती है कि अब बहानेबाजी (High Court Strict on Bad Roads in Chhattisgarh) नहीं चलेगी।
हाईवे पर चल रहा काम, कोर्ट में पेश हुई रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान NHAI ने बताया कि रायपुर से बिलासपुर के बीच 105.98 किमी लंबे नेशनल हाईवे की मरम्मत और रखरखाव दो कंपनियों को सौंपा गया है।
रायपुर से सिमगा (48.58 किमी) तक एमएस पुंज लॉयड और सिमगा से पेंड्रीडीह (57.40 किमी) तक एमएस कन्हैयालाल अग्रवाल काम कर रही है।
अब तक किए गए कार्यों में 57.22 किमी घास और झाड़ियों की सफाई, 53.2 किमी सड़क की धुलाई, 43 नए हेजर्ड मार्कर, 17,795 रिफ्लेक्टर स्टिकर, 14,658 रोड स्टड्स और 59 ट्रैफिक संकेतक लगाए गए हैं।
इसके अलावा 23 किमी सड़क पर नई रोड मार्किंग की गई, 622 मीटर क्रैश बैरियर बदले गए और 1,041 नई LED स्ट्रीट लाइटें लगाई गईं। साथ ही 3.54 करोड़ रुपये की नई मरम्मत योजना का टेंडर भी स्वीकृत कर दिया गया है और काम शुरू करने के आदेश जारी किए गए हैं।
लेकिन अदालत का रुख इस बात को लेकर सख्त (High Court Strict on Bad Roads in Chhattisgarh) है कि केवल कागजों में मरम्मत और योजनाओं से काम नहीं चलेगा, सड़कों पर ठोस नतीजे दिखने चाहिए।
बिलासपुर की टूटी सड़कें और तकनीकी दिक्कतें
कोर्ट में दाखिल शपथपत्र में बताया गया कि पेंड्रीडीह चौक से नेहरू चौक तक 15.375 किमी लंबी सीमेंट कंक्रीट रोड 2016 में बनी थी, जिसमें अब बड़े पैमाने पर दरारें आ चुकी हैं।
PWD ने माना कि यदि इस पर सीधे डामर बिछाया गया तो वह भी जल्द टूट जाएगा।
इसी कारण विभाग ने NIT रायपुर, IIT खड़गपुर, IIT रुड़की और CRRI नई दिल्ली जैसे संस्थानों को तकनीकी राय के लिए पत्र लिखा है। NIT रायपुर ने मरम्मत का प्रस्ताव भेज दिया है, लेकिन अन्य संस्थानों का जवाब आना बाकी है।
इस पर अदालत ने नाराजगी जताई कि इतने वर्षों में भी ठोस कदम नहीं उठाए गए।
अदालत ने आदेश दिया कि PWD सचिव तत्काल मरम्मत कराएं और 4 सितंबर को प्रगति रिपोर्ट पेश करें।
अदालत की सख्ती (High Court Strict on Bad Roads in Chhattisgarh) ने साफ कर दिया है कि अब देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रतनपुर-सेन्दरी रोड पर भी ध्यान
अमाइकस क्यूरी (न्याय मित्र) ने कोर्ट को बताया कि रतनपुर से सेन्दरी रोड पर कई ब्लैक स्पॉट हैं और नालियों से पानी सड़क पर बह रहा है, जिससे हादसों का खतरा और बढ़ जाता है।
इस पर कोर्ट ने NHAI को भी अलग शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यदि निर्धारित समय में सड़क मरम्मत का काम पूरा नहीं हुआ तो हादसों की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।
इस टिप्पणी ने विभागों की जवाबदेही (High Court Strict on Bad Roads in Chhattisgarh) को और कठोर कर दिया है।
सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जब सड़कें जनता के जीवन से जुड़ी हुई हैं तो उनकी देखरेख केवल आदेशों पर निर्भर क्यों है।
राज्य सरकार और संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करना ही होगा। अदालत ने चेतावनी दी कि लापरवाही और देरी से होने वाले हादसों की जिम्मेदारी (High Court Strict on Bad Roads in Chhattisgarh) विभागीय अफसरों पर तय होगी।